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क्या रंग लाएगी ‘जादू की झप्पी’?

दृष्टिकोण. jaradari क्या आप जानते हैं कि पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का पसंदीदा हीरो कौन है? अगर नहीं, तो जान लीजिए कि संजय दत्त जरदारी के पसंदीदा हीरो हैं। इसके कई कारण हैं।

2005 की शुरुआत में मैंने निर्वासित जीवन जी रहीं बेनजीर भुट्टो और राष्ट्रपति के बीच पर्दे के पीछे हो रही एक डील के बारे में लिखा था। अमेरिका के तत्कालीन राजदूत क्र ॉकर के जरिये मुशर्रफ और बेनजीर के बीच डील हो रही थी। अमेरिका चाहता था कि बेनजीर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में मुशर्रफ का साथ दें और इसके बदले में मुशर्रफ आसिफ अली जरदारी को जेल से रिहा करने को तैयार थे। लेख प्रकाशित होने के बाद मुझे जरदारी के करीबी दोस्तों के फोन आने लगे। उनका आरोप था कि मैंने बिना किसी आधार के मुशर्रफ और बेनजीर के बीच डील की बात लिख दी है।

उर्दू दैनिक में लेख छपने वाले दिन दोपहर के समय मुझे जरदारी के करीबी दोस्त डॉ. कयूम समरू का फोन आया और उन्होंने मुझसे थोड़ी देर के लिए रावलपिंडी स्थित अकाउंटेबिलिटी कोर्ट में आने की गुजारिश की। भ्रष्टाचार के एक लंबित मामले में जरदारी क ो इस कोर्ट में पेश किया जाना था।

जज के अत्यधिक व्यस्त होने का लाभ जरदारी अपने दोस्तों से मिलने में उठाना चाहते थे। फोन आने के एक घंटे बाद मैं रावलपिंडी की कोर्ट में था जहां जरदारी को उनके समर्थकों और दोस्तों ने घेर रखा था। मुझे देखते ही जरदारी कुर्सी से उठे और बांहों में लेते हुए बोले ‘आ तुझे जादू की झप्पी लगाऊं’। उन्होंने बड़ी गर्मजोशी से मुझे गले लगाया और कोर्ट के एक कोने में ले गए। जरदारी ने पूछा कि किस आधार पर मैंने मुशर्रफ और उनकी पार्टी के साथ डील की बात लिखी है?

जरदारी का सवाल सुनकर मैंने मुस्कराते हुए कहा कि, ‘क्या आईएसआई ने जेल में आपसे सीधी डील करने की कोशिश नहीं की थी? आपके द्वारा इनकार करने पर उन्होंने अमेरिकियों की मदद से दुबई में रह रही बेनजीर से संपर्क साधा’। मेरी बात सुनते ही जरदारी को सांप सूंघ गया। कुछ क्षण बाद बिना किसी लाग-लपेट के बोले, ‘एक दोस्त होने के नाते आपकी क्या राय है? क्या मुझे मुशर्रफ पर भरोसा कर लेना चाहिए’? मैंने उन्हें साफ शब्दों में कहा कि मुशर्रफ आपसे नफरत करता है और वह समय आने पर आपको और आपकी पार्टी को निश्चित रूप से धोखा देगा। मेरा जवाब सुनकर जरदारी खामोश हो गए और फिर मुस्कराते हुए बोले ‘टेंशन नहीं लेने का, सब ठीक हो जाएगा’।

जरदारी के मुंह से इस तरह की भाषा मैंने पहली बार सुनी थी। मैंने जानने की कोशिश की कि जरदारी की भाषा को क्या हो गया है? मुझे हैरान देखकर जरदारी हंसे और बोले, ‘अदालत ने मुझे जेल में टीवी देखने की इजाजत दी है और एक केबल ऑपरेटर की मदद से मैंने भारतीय फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ देखी है’।

फिल्म की दो बातें जरदारी को छू गई थीं। पहली संजय दत्त की ‘जादू की झप्पी’ जो उसे कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने लायक बनाती थी और दूसरी उसका डायलॉग ‘टेंशन नहीं लेने का, सब ठीक हो जाएगा’।

कई बार मुझे लगता है कि इस फिल्म का हीरो संजय दत्त भी आसिफ अली जरदारी जैसा ही है। पाकिस्तान में आसिफ की छवि एक अच्छे व्यक्ति की कभी नहीं रही। हालांकि उन्हें दिल का नेक इंसान माना जाता है। अब जबकि यह व्यक्ति पाकिस्तान का राष्ट्रपति बन चुका है, इसके सामने कई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। जरदारी इन सभी चुनौतियों का सामना कोई टेंशन लिए बगैर करना चाहते हैं।

कुछ समस्याओं का समाधान तो जरदारी ‘जादू की झप्पी’ से ही कर लेना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समझना होगा कि रील और रियल लाइफ में फर्क होता है। न्यूयार्क में हाल ही में उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को जादू की झप्पी से जीतने का प्रयास किया। वह सियाचिन और सर क्रीक विवाद खत्म कर दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी के हिमायती हैं। न्यूयार्क में उन्हें विदेश मंत्री द्वारा सावधानी से काम लेने की सलाह दी गई थी जिसके बाद जरदारी ने अमेरिका के मशहूर अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ में इंटरव्यू देकर कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर पाकिस्तान को कोई परेशानी नहीं है।

भारत कभी भी पाकिस्तान के लिए खतरा नहीं रहा और कश्मीर में खून- खराबा करने वाले जेहादी नहीं, आतंकी हैं। यह खबर भारतीय मीडिया के लिए किसी अचंभे से कम नहीं थी। सूचना मंत्रालय द्वारा ‘वॉल स्ट्रीट जनरल’ में छपे इंटरव्यू का खंडन किए जाने के बावजूद जरदारी ने हिम्मत नहीं हारी है। अब वह भारत का सरबजीत सिंह उर्फ मंजीत सिंह जो पाकिस्तान की जेलों में १८ साल गुजार चुका है, को रिहा करना चाहते हैं।

सरबजीत को १९९क् में लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान के टीवी चैनल बार-बार वह वीडियो दिखा रहे हैं जिसमें सरबजीत को अपनी गलती स्वीकार करते हुए दिखाया गया है। भारत विरोधी पत्रकारिता से विचलित हुए बगैर राष्ट्रपति जरदारी ने अपने कानून मंत्री को कोई बीच का रास्ता निकालने का निर्देश दिया है।

मेरे साथ हुई बातचीत में कानून मंत्री फारूक नाइक ने कहा कि हम सरबजीत के बदले बड़ी संख्या में पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई चाहते हैं। उन्हें पता है कि ऐसा करना बहुत मुश्किल है क्योंकि कई विपक्षी पार्टियों ने पहले ही कश्मीर के मुद्दे को उछालना शुरू कर दिया है। जरदारी को गद्दार करार देने वाली विरोधी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि कश्मीर में कफ्यरू लगाकर मुस्लिमों पर जुल्म करने वाले भारत को जरदारी रियायतें देना चाहते हैं।

दूसरी तरफ सरबजीत को रिहा कर जरदारी भारत-पाक के बीच बेहतर रिश्तों की शुरुआत के पक्षधर हैं। उनकी चिंता यह है कि भारत के हीरो संजय दत्त अगर दोनों मुल्कों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हो सकते हैं, तो नेता क्यों नहीं? शायद वे नहीं जानते कि कलाकारों और निर्देशकों के पास बेचने के लिए बढ़िया-बढ़िया कहानियां होती हैं लेकिन नेताओं के पास नहीं। मौजूदा हालात में ऐसा माहौल बन रहा है जिसमें मनमोहन सिंह और जरदारी ऐसी कहानी लिख सकते हैं जो भारत, पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर में सराही जा सकती है। उम्मीद करनी चाहिए कि न्यूयार्क में जरदारी की ‘जादू की झप्पी’ रंग लाएगी।
-लेखक इस्लामाबाद स्थित जिओ टीवी के कार्यकारी संपादक हैं।





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