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International International वाशिंगटन.
ऐतिहासिक भारत-अमेरिकी असैन्य परमाणु करार संबंधी विधेयक को अपने हस्ताक्षरों से कानूनी रूप देने के फौरन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने कहा है कि उनके और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा तीन साल पहले देखा गया सपना साकार हुआ है।
साथ ही उन्होंने कांग्रेस द्वारा बिल पारित करने को मील का पत्थर बताया। बुश ने विधेयक एचआर 7081 के कुछ प्रावधानों पर भारत की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि 123 समझौते में जताई गर्ई ईधन आपूर्ति संबंधी प्रतिबद्धताओं में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। बुश की यह टिप्पणी भारत द्वारर्ा ईधन आपूर्ति के बारे में जताई गई चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई है।
उधर, बुश के हस्ताक्षर के पहले विदेश विभाग के प्रवक्ता सीन मैक्कॉर्मेक ने बताया कि शुक्रवार को अपराह्न् 4 बजे (भारतीय समयानुसार शनिवार तड़के1:30 बजे) विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और उनके भारतीय समकक्ष प्रणव मुखर्जी परमाणु करार पर हस्ताक्षर करेंगे।
बुश ने हस्ताक्षर के बाद ह्वाइट हाउस से जारी बयान में कहा कि उन्हें अमेरिका-भारत परमाणु सहयोग मंजूरी और अप्रसार वृद्धि कानून पर हस्ताक्षर करके खुशी हुई है। इससे 123 समझौते को मंजूरी मिलेगी। यह कानून अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करेगा तथा इससे दोनों देशों को काफी लाभ मिलेगा। यह समझौता परमाणु ऊर्जा कानून और अन्य अमेरिकी कानूनों के अनुरूप है।
- ‘मेरा मानना है कि बुश का बयान काफी कुछ कहता है। विधेयक की कुछ बातों को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं वे सब दूर हो गई हैं।’
- रोनेन सेन, अमेरिका में भारत के राजदूत