नई दिल्ली. कुपोषण के कारण मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चों के मौत की खबर के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुरुवार को कहा कि देश के करीब आधे बच्चे कुपोषित हैं।
आयोग का कहना है कि इसकी वजह सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंचना है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एस राजेंद्र बाबू ने कहा कि यह देश के समक्ष सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। देश में बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद कोई भी योजना इतनी अच्छी नहीं है कि उसमें देश के सभी बच्चे शामिल हों।
जरूरतमंद से दूर योजना : बाबू ने आरोप लगाया कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को जिस तरीके से लागू किया जाना चाहिए था, वे उस तरीके से लागू नहीं हो रही हैं। ये योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, अन्यथा मध्यप्रदेश में इतने बच्चों की मौत नहीं होती।
159 बच्चों की मौत : मध्यप्रदेश की एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा ‘भोजन का अधिकार अभियान’ द्वारा वहां की हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के मुताबिक, राज्य में कुपोषण के कारण 159 बच्चों की मौत हो चुकी है। ये मौतें इस वर्ष 8 मई से लेकर 10 सितंबर के बीच हुई हैं।
जब कभी इस तरह की रिपोर्ट (कुपोषण के कारण मौत) मिलती है, हम सरकार को सूचना देते हैं। इसके बदले में हमें सरकार का नियमित जवाब मिलता है .. मसलन ऐसी कोई मौत नहीं हुई है, मौत किसी दूसरी बीमारी की वजह से हुई।’
—जस्टिस एस राजेंद्र बाबू, अध्यक्ष, राष्ट्रीय योजना आयोग