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बदलती वैश्विक सभ्यता की बिंदास अभिव्यक्ति के हस्ताक्षर

‘बहुत कुछ घटता है मेरे आसपास’
मैं बिखरता नहीं हूं
मेरे खून में है..
आकाश का खुलापन
और समुद्र की गहराई-
शायद यही है शेष जिंदगी की परवाज के पंख..’
-क्लेजियो की लंबी कविता ‘बाढ़’ का एक अंश।

ज्यां मेरी गुस्ताव ली क्लेजियो असल में जिंदगी की अभिव्यक्ति के विद्रोही चितेरे हैं। नोबेल पुरस्कार से अलंकृत इस लेखक का मानना है कि अब जीने का कोई अपना ही बहाना चाहिए, नहीं तो यह सभ्यता समय के तेज बदलाव की आंधी में अपने आप रसातल की तरफ चली जाएगी।

अभिव्यक्ति के विद्रोह को अपने बिंदास अंदाज में बयां करने वाले फ्रांसीसी लेखक ज्यां मेरी गुस्ताव ली क्लेजियो का मानना है कि ‘जिंदगी कुछ भी नहीं महज अपने से अपने तक विद्रोह की एक ऐसी यात्रा है जो शायद कभी शुरू भी नहीं होती तथा खत्म भी नहीं होती, होता बस यही है कि आदमी पैदा होता है तथा चला जाता है। यही इस प्लेनेट पर उसके आने का ख्वाबों का एक ऐसा मंजर है, जो जिंदगी भर उसके नाम के साथ-साथ चलता रहता है।’

ज्यां मेरी गुस्ताव ली क्लेजियो विश्व के उन प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं, जिन्हें फ्रेंच, अंग्रेजी तथा जर्मन भाषा में समान रूप में पढ़ा जाता है। क्लेजियो के समूचे रचनाक्रम में जिंदगी की गहरी संजीदगी तथा बिंदास अंदाज में सपनों के प्रणोता का अक्स देखने व महसूस करने से ही पता चलता है कि क्लेजियो कितने गहरे मानवीय संवेदनाओं से जुड़े हुए हैं। फ्रांसीसी भाषा के इस लेखक को नोबेल पुरस्कार का मिलना विश्व साहित्य की एक अहम घटना माना जा सकता है। विश्व साहित्य की उस बानगी जिसमें ज्यां मेरी गुस्ताव ली क्लेजियो ने अपनी रचना-प्रक्रिया को अपने लहू से सींचा है, वह उनके उपन्यासों, उनकी डायरियों तथा उनके ललित निबंधों में सर्वोत्तम मानी जाती है।

जेएमजी क्लेजियो के नाम से प्रसिद्ध इस लेखक ने जिंदगी में बेहद उतार-चढ़ाव का समय देखा है। अपनी साठ से ज्यादा कृतियों तथा विश्व की 21 भाषाओं में अनूदित होने वाले इस लेखक के कई उपन्यासों पर हॉलीवुड तथा फ्रेंच फिल्मकारों ने परदे पर भी अभिव्यक्ति से इनके सृजित किरदारों को एक नए रूप में समूचे विश्व में परिलक्षित किया है। क्लेजियो ने अपनी रचना की प्रक्रिया यात्रा 1963 में अपने पहले विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘ली प्रोसेस वर्बल’ के साथ शुरू की तथा अगले ही वर्ष 1964 में उनका उपन्यास ‘इंटेरोगेशन’ इस तरह से साहित्य हलकों में चर्चारत हुआ कि उन्हें युवा लेखक से प्रौढ़ लेखकों में शामिल कर लिया गया। जिंदगी की ऐसी सच्चइयों जिनमें एक नया सामाजिक चित्रण हो सकता है तथा आदमी के भीतरी संकट की घड़ी में आदमी क्या कर सकता है।

अपनी अन्य पुस्तकों में जिनमें उपन्यास 1967 टेराआमटा तथा फीवर इत्यादि शामिल हैं। इनमें उन्होंने एक मंझे हुए लेखक की ख्याति अर्जित की। यही वो उपन्यास है जिन्होंने क्लेजियो को एक प्रवर्तक तथा अभिव्यक्ति के विद्रोही के तौर पर प्रचारित किया गया। क्लेजियो एकमात्र ऐसे लेखक हैं जो फ्रेंच के साथ अंग्रेजी भाषा में भी बराबर पढ़े जाते हैं। 1970 के बाद अपने तमाम रचनाक्रम में क्लेजियो अपनी बदली हुई शैली में दिखाई देते हैं।

‘द एडवेंचर स्टोरी’, ‘द बार’, ‘द मेक्सिकन ड्रीम’, ‘द प्रॉस्पेक्टर’, ‘द राउंड एंड अदर हार्ड कोर्ड फैक्ट्स’ के साथ-साथ ‘वंडरिंग स्टार’ ऐसे प्रसिद्ध उपन्यास हैं जिनमें क्लेजियो अद्भुत स्वप्नशील किरदारों के सृजक के रूप में सामने आते हैं। इन तमाम उपन्यासों में उन्होंने भाषायी स्तर पर एक ऐसी भाषा का संजाल तैयार किया है, जो बिंदास तथा अभिव्यक्ति के विद्रोह का सुमेल है, इसीलिए उन्हें आज के बदलते हुए आदमी के मूड का सफल लेखक माना जाता है।

लेखक क्लेजियो एक सफल शैलीकार तथा चिंतक भी हैं। जो नई सदी के नए बौद्धिक विश्लेषणों को अपनी रचना प्रक्रिया का अंश बनाकर आज के आदमी का एक नया स्वरूप चित्रण करने में सफल हुए हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे पिछले 25 वर्र्षो में लाखों पाठकों को आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं। मौलिक रचनाओं के साथ-साथ उन्होंने समीक्षा की बहुत-सी पुस्तकों का लेखन भी किया है जिनमें उनके द्वारा रचित ‘सलेक्टिक प्रिटीसीज्म मारिना’, ‘एवुलेशन ऑफ स्प्रीच्युअल पावर’ इत्यादि बेहद प्रसिद्ध है। 1985 में प्रकाशित प्रोपेक्टर तथा 2006 में प्रकाशित ‘रागा’ में वह एक ऐसे नखलिस्तान की जिंदगी को रूपवान करते हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में दिखाई देती है तथा आज के वैश्वीकृत संसार में वह धीरे-धीरे खत्म होती जाती है। सभ्यताओं की परंपरा तथा भाषाओं की मिली-जुली तहजीब तथा भाषायी समरसता का एक ऐसा गुलदस्ता उनके इन उपन्यासों में दिखाई देता है, जो हजारों-हजारों को उन्हें पढ़ने के लिए स्वयं ही आकर्षित करता है।
-लेखक प्रसिद्ध विश्व साहित्य विश्लेषक हैं।





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