भोपाल. प्रदेश के सामान्य मेडिकल कालेज तो पहले से ही एमसीआई की मान्यता को लेकर सवालों के घेरे में हैं, वहीं अब आयुर्वेद कालेजों पर भी संकट आ गया है।
सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) ने सात में से छह कालेजों में सुविधाओं की कमी की वजह से चालू सत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी है। ऐसे में उन छात्रों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है जो पहले ही इन कालेजों में प्रवेश ले चुके हैं।
जिन कालेजों में प्रवेश पर रोक लगी है उसमें ग्वालियर, रीवा, उज्जैन, बरहानपुर, इंदौैर और जबलपुर के शासकीय आयुर्वेद कालेजों शामिल हैं। इसके बाद अब प्रदेशभर में केवल 150 सीटें ही मान्य होंगी जो कि भोपाल, मंदसौर और चित्रकुट के आयुर्वेद कालेजों की हैं।
सीसीआईएम ने सभी छह कालेजों में टीचिंग और पैरामेडिकल स्टाफ, 100 से 50 बिस्तर का अस्पताल, लेबर रूम, औषधि उद्यान आदि मूलभूत सुविधाओं की कमी पायी थी। काउंसिल के अनुसार इन सुविधाओं के बिना आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता नहीं रहेगी। सूत्रों के मुताबिक बीते अगस्त में ही सभी आयुर्वेद कालेजों को इस बारे में जानकारी दे दी गई थी।
मप्र आयुर्वेद छात्र संगठन के पीजी एसोसिएशन अध्यक्ष डा. राकेश पांडे ने ‘भास्कर’ से चर्चा में इसे प्रदेश के लिए शर्मनाक बताया है। वहीं ग्वालियर आयुर्वेद कालेज के प्राचार्य बी. एम. गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के छह शासकीय आयुर्वेद कालेजों में काउंसिल ने 2008-09 वर्ष के लिए प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसका कारण निरीक्षण के दौरान कालेजों में स्टाफ की कमी है जिसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन कानूनी बाध्यता के कारण देरी हो रही है।
पहले से थी जानकारी
छात्र संघ के अध्यक्ष डा. अजय अवस्थी के मुताबिक प्रवेश परीक्षा के पहले भी कालेजों को इस अंजाम की जानकारी थी। क्योंकि सीसीआईएम ने अगस्त के पहले ही कालेजों का दौरा कर इन कमियों को उजागर कर दिया था।
‘अभी तक मान्यता रद्द करने से संबधित कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। पहले से ऐसी कोई बात भी नहीं चल रही थी।
- एम. के वाष्ण्रेय, आयुक्त आयुष विभाग