इंदौर. दुनियाभर के शेयर बाजारों में चल रही मंदी का असर प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी इंदौर के निवेशकों पर दिखने लगा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है मंदी के दौर में इंदौर में करीब 45 हजार निवेशकों का धन डूब गया जो अरबों में है।
देश की कुल आबादी के दो प्रतिशत लोग डीमेट अकाउंट होल्डर हैं। बैंकों से मिली डीमेट अकाउंट्स व शेयर ब्रोकरों के मुताबिक इंदौर में लगभग 50 हजार निवेशक हैं और रोजाना 500 करोड़ की ट्रेडिंग होती है।
इंडो-थाई सिक्युरिटी के चेयरमैन पारस दोशी कहते हैं आज की स्थिति में लगभग 45 हजार निवेशकों का पैसा डूबा हुआ है। आने वाले एक-दो साल में इससे उबरने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। निवेशक अभी सिर्फ बाजार में लगे हुए पैसे को ही बचाने की फिक्र करें।
नया निवेश न करें। आनंद राठी सिक्युरिटीज के रीजनल डायरेक्टर निशांत नयाती कहते हैं एक भी निवेशक ऐसा नहीं है जिसका पैसा नहीं डूबा। जनवरी से अभी तक इंदौर का बाजार 20 हजार करोड़ से 10 हजार करोड़ रह गया है। सबसे ज्यादा नुकसान फ्यूचर ऑप्शन में है। 20 साल से प्रोप्राइटर का काम कर रहे ब्रजेश नीमा कहते हैं बाजार और गिरा तो स्थिति भयावह होगी।
ऐसी गलतियां कर रहे हैं निवेशक
>> बाजार गिरने के बाद भी लगातार पैसा लगा रहे हैं।
>> छोटे निवेशक चाहकर भी बाजार से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और उनका पैसा फंस गया है।
>> सलाह और बयानों का आंकलन गलत साबित हो रहा है।
>> इतने दिनों में छह देशों ने ब्याज दर घटा दी और आने वाले दिनों में भारत में भी सीआरआर में कटौती की आशा है। ऐसे मेजर करेक्शन थोड़े समय के लिए तेजी का अहसास कराएंगे। निवेशक ऐसे भ्रम में फंस जाते हैं और बाजार फिर गिर जाता है। इसलिए निवेशक इन सब बातों का ध्यान रखते हुए लिक्वीडिटी बनाए रखें।
उबरने का गुर
निवेशक घाटे को पाटने के लिए अपनी जमा पूंजी का एक भाग शेयर मार्केट में, एक करेंसी में व एक भाग कमोडिटी में डालें। ताकि इसके घाटे को उस मार्केट से निकाल पाएंगे। मार्केट का टर्नओवर 10 गुना बढ़ा है और एक माह पहले ही चालू हुआ करेंसी मार्केट रोज 2000 करोड़ प्रतिदिन के टर्नओवर से बढ़ रहा है।