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इंदौर की आत्मा निखरेगी

इंदौर. इंदौर की आत्मा पुराने शहर (शास्त्री ब्रिज से बड़ा गणपति और पोलोग्राउंड से महू नाका) की रंगत बदलने के लिए नगर निगम ने जेएनएनयूआरएम के तहत प्रस्ताव तैयार किया है।

इसमें राजबाड़ा, कृष्णुपरा छत्री, बोलिया छत्री जैसी धरोहर भी संरक्षित की जाएगी। इसके लिए इन क्षेत्रों का मास्टर प्लान और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने हेतु निगम ने विज्ञापन जारी किए थे। इसमें देश की १क् कंपनियों ने रुचि ली है। जवाबदारी किस कंपनी को दी जाएगी, इसका फैसला निगोसिएशन और महापौर परिषद व निगम परिषद की मंजूरी के बाद होगा।

चुनी गई कंपनी मास्टर प्लान बनाकर बताएगी कि पुरानी धरोहरों के साथ छेड़छाड़ किए बगैर ६४२ हेक्टेयर में फैले क्षेत्र को कैसे सुंदर और सुनियोजित बनाया जा सकता है। इसके बाद डीपीआर बनेगी। अपर आयुक्त योजना विवेक सिंह ने बताया कि इसमें क्षेत्र की हर आवश्यकता को तवज्जो दी जाएगी। फिर वह सड़क चौड़ी करने का मामला हो या ड्रेनेज-पेयजल लाइनों की उपलब्धता का।

कंपनी न सिर्फ मास्टर प्लान और डीपीआर बनाएगी बल्कि उसे हर स्तर पर स्वीकृत करवाने में निगम की मदद भी करेगी। काम कैसा होगा और इसे कैसे अंजाम दिया जा सकता है, इसका शेड्यूल बनाने के साथ प्रोजेक्ट के सुरपविजन की जवाबदारी भी कंपनी की होगी। मिशन से पहली किस्त जारी होने के बाद ही कंपनी को भुगतान होगा।

इसलिए बुलाई बाहरी कंपनियां
स्थानीय कंपनियां डीपीआर बनाने के ही लाखों रुपए लेती हैं। फिर वह स्वीकृत हो या न हो, इससे उनका कोई लेना-देना नहीं रहता। दूसरा उन्हें ऐसे कामों का अनुभव भी नहीं है। ऐसे में बाहरी कंपनियों की मदद लेने का निर्णय लिया गया। जिन कंपनियों ने रुचि ली है उनमें कई पुणो, हैदराबाद सहित दूसरे शहरों के लिए योजना बना चुकी हैं।

इसलिए पड़ी आवश्यकता
एक ओर शहर की सीमाएं बढ़ रही हैं तो दूसरी ओर पुराने शहर में अव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं। शिकवा-शिकायत से नाउम्मीद हो चुके लोगों के पास पलायन ही विकल्प बचा है लेकिन वे उस जमीन को नहीं छोड़ना चाहते जिससे उनकी वर्षो पुरानी यादें जुड़ी हैं। ऐसे में क्षेत्र को व्यवस्थित करना जरूरी है।

कठिन है क्रियान्वयन
सड़कें चौड़ी करने के लिए भारी तोड़फोड़ करना होगी। अधिकतर मकान पुराने और वैध हैं। तोड़फोड़ से पहले जमीन अधिग्रहण करने के लिए ठोस कानून बनाना पड़ेगा या लोगों को इतना मुआवजा देना पड़ेगा कि उन्हें जमीन देने में कोई आपत्ति न हो।

- क्षेत्र ऊंचा-नीचा है। नया ड्रेनेज सिस्टम और पेयजल लाइन लेवल मिलाना मुश्किल होगा। इसके लिए कहीं ज्यादा तो कहीं कम खुदाई करना होगी।
- बहुमंजिला पार्किग बनाना पड़ेगी या पार्किग प्लॉट विकसित करना होंगे।

मिलकर संवारेंगे इंदौर को
हश्र बाकी योजनाओं की तरह नहीं होगा। शहर की रंगत बदलने के लिए जो योजना तैयार की है उसे अंजाम तक पहुंचाकर रहेंगे। इसमें क्षेत्र की हर आवश्यकता और विकास की संभावनाओं को तवज्जो दी जाएगी। फिर वह सड़क चौड़ीकरण और ड्रेनेज-पेयजल लाइनों की उपलब्धता हो या बहुमंजिला पार्किग स्थलों का निर्माण। उम्मीद है योजना के क्रियान्वयन में राजनीतिक-सामाजिक-व्यावसायिक संगठनों के साथ लोगों का भी सहयोग मिलेगा।
डॉ. उमाशशि शर्मा, महापौर





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