जयपुर. जेडीए ने जो मकान 9 हजार रुपए में दिए थे ,उसका वह अब ब्याज पौने दो लाख रुपए वसूलना चाहता है। मुरलीपुरा में रहने वाले 398 परिवार इस समस्या का सामना कर रहे हैं।
यहां मकान की किश्त चुकाने में हुए देरी ब्याज व पैनल्टी की राशि बढ़ कर पौने दो लाख रुपए हो गई है। जेडीए ने सरकार को पत्र लिख कर निर्देश देने की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण जेडीए ने ब्याज व पैनल्टी माफ नहीं की है।
यह मामला है
जयपुर में 1982 में बाढ़ पीड़ितों को सरकार ने मुरलीपुरा में 66 रुपए प्रति माह की किश्त पर 2 हजार मकान देने की घोषणा की थी। 1984 में 2 हजार मकान आवंटित किए गए और किस्त 20 साल की थी। इनमें से बड़ी संख्या में लोग किस्त जमा नहीं करा पाए। राज्य सरकार ने 2002 में प्रशासन शहरों के संग अभियान में ब्याज व पैनल्टी माफ कर दी थी। इसका 1500 परिवारों ने लाभ उठाया था लेकिन 398 परिवार इसका लाभ नहीं उठा पाए थे।
खाली आश्वासन मिले
स्थानीय समाज सेवा समिति के सचिव सुशील शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय विधायक वीरूसिंह राठौड़, सांसद गिरधारीलाल भार्गव, जेडीए, व नगरीय विकास विभाग को पत्र लिख कर ब्याज व पैनल्टी माफ कराने में मदद मांगी थी लेकिन वहां से उन्हें सिर्फ आश्वासन ही दिए गए। वे नगरीय विकास मंत्री सुरेन्द्र गोयल से भी मिले लेकिन उन्होंने भी कोई मदद नहीं की। ये मामला अभी फाइलों में ही अटका हुआ है।
मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन
हम भी पीड़ितों को राहत देना चाहते हैं लेकिन ब्याज व पैनल्टी माफ करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। जेडीए ने ब्याज व पैनल्टी माफ करने की चिट्ठी राज्य सरकार के पास भेज दी है। यह मामला अब राज्य सरकार के पास विचाराधीन है।
—वासुदेव शर्मा, उपायुक्त जेडीए जोन-6