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सूखे खेतों में भरपूर पैदावार!

रायपुर. प्रदेश के चार जिले सूखे से जूझ रहे हैं। यहां धान की पैदावार कम होने की आशंका है। राज्य में कितना धान कम होगा, इसे लेकर कृषि विभाग के अफसरों ने सरकार को उलझा दिया है। उन्होंने केंद्र को भेजे प्रस्ताव में यह कमी 1 फीसदी और सरकार को 10 से 15 प्रतिशत बताई है।

दिलचस्प यह कि सूखे और कीटप्रकोप के बावजूद अधिकारी कह रहे हैं कि धान उत्पादन सामान्य होगा। पिछली दफा राज्य में 52.67 लाख मी.टन धान हुआ था। दिल्ली में फूड मिशन की बैठक में अधिकारियों ने इस बार 52 लाख मी.टन धान होने की रिपोर्ट दी है। यानी केवल .67 प्रतिशत उत्पादन कम होने की आशंका जताई। उन्होंने यह भी बताया कि गत वर्ष प्रति हेक्टेयर 14.76 टन धान हुआ जो इस साल 14.45 टन होने की संभावना है।

इस हिसाब से कृषि विभाग सामान्य स्थिति बता रहा है जबकि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह चार जिलों को सूखा घोषित कर राहत कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दे चुके हैं। सोमवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक में अफसरों ने उत्पादन 10-15 प्रतिशत तक कम होना बताया था।

जानकारों का कहना है कि सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा से तो निपटना कठिन हो सकता है, लेकिन तकनीकी रूप से किसानों को ट्रेनिंग देकर धान उत्पादन में कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए मिशन के तहत मिली राशि का उपयोग करने से विभाग के अधिकारी चूक गए। सूखे की स्थिति काफी पहले से बन गई थी। धमतरी, कुरूद, कांकेर, रायपुर, कवर्धा, राजनांदगांव, महासमुंद आदि क्षेत्र में फंगस और कीड़ों का प्रकोप हुआ। इनसे बचने के उपाय फील्ड में जाकर अधिकारी नहीं बता सके।

धमतरी और कुरुद क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जो दवा खेतों मे डाली जा रही है वह कीड़ों पर बेअसर हो रही है। यानी किसान दवा खरीद कर भी पैसा बपबाद कर रहे हैं धान बरबाद हुआ सो अलग। मिशन के तहत कीट नियंत्रण एक बड़ा कार्यक्रम है। इसके लिए केंद्र पैसा देता है। इससे एक-दो माह बाद पकने वाली 1001, 1010, स्वर्णा आदि को बचाया जा सकता था।

क्या है मिशन?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का उद्देश्य देश में खाद्य उत्पादन में कमी को रोकना है। किसानों को दलहन-तिल्हन खाद्यान्न फसलें लगाने प्रेरित करना है। फसलों को बचाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक जनकारी और ट्रेनिंग देने का प्रावधान भी है। केंद्र सरकार किसानों को ट्रेनिंग, उन्नत बीज और खाद, पौध संरक्षण, कीट सुरक्षा, किसानों को पंप सेट देने, ड्रिप इरिगेशन आदि के लिए राज्यों को करोड़ों रुपए का फंड दता है।

अफसर ने कहा
कृषि सचिव विकासशील ने कहा कि फूड सिक्योरिटी मिशन की राशि का सूखे के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। कीट प्रकोप के बाद उसके उपचार के लिए खर्च का प्रावधान रहता है। वह भी शुरूआती दौर में किया जाता है। राशि का कितना इस्तेमाल हुआ या नहीं यह संचालक बताएंगे।

चिंतित सीएम ने ली बैठक, अनावरी रिपोर्ट मांगी
मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने कल मंत्रालय में सूखा प्रभावित जिलों में राहत कार्य शुरू करने योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने मुख्यसचिव पी. जाय उम्मेन को निर्देश दिए कि कलक्टरों से नजरी आनावरी रिपोर्ट मंगवाई जाए। उन्होंने अल्प वर्षा वाले इलाकों को चिन्हित करने और वहां जलाशयों से पानी उपलब्ध कराने को कहा।

सीएम ने योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान सहायता के रूप में ट्यूबवेलों में वाटर रिचार्जिग, आदिवासी और सीमांत किसानों को अनुदान पर नलकूपों में वाटर चार्जिग, माइक्रो इरिगेशन यंत्रों का वितरण करने के निर्देश दिए। कमिश्नर सरजियस मिंज ने विभागीय योजनाओं से किसानों को सहायता देने की जानकारी दी।





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