अहमदाबाद.
टाटा की महत्वाकांक्षी ‘नैनो’ परियोजना पश्चिम बंगाल के बाद अब गुजरात में भी भूमि विवाद में फंसती नजर आ रही है।
साणंद के किसानों का आरोप है कि सरकार ने उनके पूर्वजों द्वारा पट्टे पर दी गई जमीन को अधिगृहीत कर टाटा मोटर्स को सौंप दी है। इसके विरोध में किसानों ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, साणंद के तहसीलदार और अहमदाबाद के कलेक्टर को नोटिस भेजा है।
वहीं, राजस्व विभाग ने जमीन को राज्य सरकार की बताते हुए कहा है कि नोटिस का कानूनी जवाब दिया जाएगा। जमीन के संबंध में सूत्रों का कहना है कि 1903 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने साणंद के राजा जयशिव सिंह और 11 किसानों से कुल 2200 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी।
इसके एवज में राजा को 1,02,000 रुपए और किसानों को 99 हजार रुपए का भुगतान किया गया था। 1949 के तहसील कानून के अनुसार इस प्रकार अधिगृहीत भूमि अपने आप सरकार की हो जाती है और अब किसानों का इस पर कोई कानूनी हक नहीं है। इसी अधिगृहीत भूमि में से टाटा को जमीन दी गई है।
किसान का दावा: उधर, साणंद के खोडा गांव के मनुबा गोविंद सिंह ने दावा किया कि पट्टे पर दी गई जमीन का रिकॉर्ड खुद सरकार के पास भी नहीं है। उनके अनुसार दो वर्ष पहले किसानों ने सूचना के अधिकार कानून के तहत जमीन के संबंध में जानकारी मांगी थी, लेकिन प्रांत अधिकारी इस संबंध में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। उनका कहना था कि गुजरात और मुंबई के बंटवारे के समय रिकॉर्ड इधर-उधर हो गए हैं। साणंद के खोडा, बोल व आंबारेली के किसानों ने टाटा की परियोजना का स्वागत करते हुए सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।
490 करोड़ में पड़ेगी टाटा को जमीन
साणंद के पास नार्थ कोटपुरा क्षेत्र में टाटा को आवंटित 1100 एकड़ जमीन 490 करोड़ रुपए में पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक 2000 करोड़ रुपए की इस परियोजना की करीब एक चौथाई राशि केवल जमीन खरीदने पर ही खर्च होगी।
सरकार ने कौड़ियों के भाव दी जमीन : कांग्रेस
वड़ोदरा. गुजरात कांग्रेस ने धमकी दी है कि अगर मोदी सरकार ने ‘नैनो’ कार प्रोजेक्ट के लिए टाटा मोटर्स के साथ किए ‘गुप्त’ समझौते को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया तो वह राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ देगी। इसके साथ ही पार्टी ने राज्य सरकार पर परियोजना की जमीन को कौड़ियों के भाव देने का भी आरोप लगाया।
एक प्रेस कांफ्रेंस में राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता अजरुन मोढवाडिया ने राज्य सरकार पर जानबूझकर कर एमओयू को सार्वजनिक न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ‘नैनो’ परियोजना को गुजरात में लाए जाने की विरोधी नहीं है।
मोढवाडिया ने कहा कि इस परियोजना से केवल टाटा को फायदा होगा, क्योंकि सरकार ने गुजरात के लोगों के हितों को ताक पर रख दिया है। उनके अनुसार टाटा यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे सिंगूर संयंत्र के कर्मचारियों को भी यहां समाहित करेंगे इसलिए साणंद में केवल चार हजार नौकरियां ही निर्मित होंगी।