रामबन/जम्मू.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बगलिहार पनबिजली परियोजना शुक्रवार को राष्ट्र को समर्पित की। कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने रामबन के चंदरकोट में 5000 करोड़ रुपए की लागत से बन रही 900 मेगावाट परियोजना के 450 मेगावाट के पहले चरण का उद्घाटन रिमोट का बटन दबाकर किया। इस परियोजना को बिजली संकट से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर केलिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए यहां त्रिस्तरीय कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सेना के जवान जहां ऊंची पहाड़ियों पर चौकसी बरत रहे थे, वहीं पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने भीतरी दो स्तरों की सुरक्षा संभाल रखी थी। उधमपुर एअरबेस पर उतरकर प्रधानमंत्री विशेष हेलिकॉप्टर से चंदरकोट पहुंचे। उन्होंने लोकार्पण समारोह के बाद जनसभा को भी संबोधित किया।
विवादों में रही है परियोजना
बगलिहार परियोजना 1999 से ही भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों का कारण रही है। हालांकि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत चिनाब, झेलम और सिंधु तीन नदियों पर भारत परियोजनाएं स्थापित कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान बराबर इसमें अड़ंगे लगाता रहता है। चिनाब नदी पर 1999 में शुरू हुई बगलिहार परियोजना को 4000 करोड़ रुपए की लागत से 2004 तक बन कर तैयार होना था, लेकिन बाढ़ और अन्य कई कारणों से इसमें विलंब होता रहा।
2005 में पाकिस्तान ने बांध की ऊंचाई (144.5 मीटर) पर अपना विरोध दर्ज कराया। जल संधि के मुताबिक भारत इस मामले को थर्ड पार्टी यानी वर्ल्ड बैंक के पास ले गया। वर्ल्ड बैंक की ओर से रेमंड ने 2007 में की गई जांच में पाक के सारे आरोपों को खारिज किया, लेकिन बांध की ऊंचाई डेढ़ मीटर कम कर दी। इसके बावजूद पाकिस्तान बांध को अपने लिए खतरा बताता रहा है।
परियोजना के मुख्य बिंदु
बांध की ऊंचाई
143 मीटर
लंबाई
362 मीटर
भूकंप झेलने
की क्षमता
10 रिक्टर पैमाने तक
घाटी की पहली ट्रेन का शुभारंभ आज
श्रीनगर. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को कश्मीर घाटी की पहली ट्रेन का यहां शुभारंभ करेंगे। बडगाम के राजवंशेर से अनंतनाग तक 66 किलोमीटर चलने वाली इस ट्रेन का पहला आधिकारिक सफर रविवार से शुरू होगा। इसमें स्नो कटर के अलावा कश्मीर के बर्फीले मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष तरह के कोच व 1400 हॉर्स पॉवर का शक्तिशाली इंजन लगाया गया है।