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मंत्री के विरोध पर दवे ने लौटाई जमीन

भोपाल. नर्मदा समग्र संस्था ने नर्मदा तट पर आवंटित चार हैक्टेयर भूमि खाद्य मंत्री अखंड प्रताप सिंह के विरोध के चलते वापस लौटा दी है। संस्था के सचिव अनिल माधव दवे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि उन्होंने जिस जमीन के लिए आवेदन किया था, उस पर आगे कोई कार्रवाई न की जाए।

श्री दवे ने आगे लिखा है कि उनकी ओर से यह विषय समाप्त माना जाए। उन्होंने जमीन आवंटन संबंधी आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए सीएम का आभार माना है, लेकिन विभिन्न कारणों से इस बारे में सहमति और असहमति बनी दिखाई दे रही है। श्री दवे ने पत्र में कहा है कि हमारे लिए नर्मदा एक गैर राजनीतिक विषय है।

नर्मदा संरक्षण का कार्य हम सभी लोग राजनीति से ऊपर उठकर कर रहे हैं और करते रहेंगे, इसलिए भूमि देने का यह स्वरूप नर्मदा संरक्षण के मूल कार्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जमीन आवंटन संबंधी आवेदन पर आगे कोई कार्रवाई न की जाए।

क्या है मामला
संस्था ने बुधनी तहसील में बांद्राभान के पास नर्मदा नदी पर शोध कार्य के लिए लगभग 13 हैक्टेयर जमीन चाही थी। इसमें से नौ हैक्टेयर जमीन के बारे में आपत्तियां बुलाने के बारे में अखबार में छपे इश्तहार में खसरे नंबर गलत प्रकाशित हो गए थे। इस वजह से इस जमीन को लेकर कुछ आपत्तियां आ र्गई। जब यह मामला बुधवार को कैबिनेट में विचार के लिए आया तो, खाद्य मंत्री अखंड प्रताप सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया।

उन्होंने सीएम से इस प्रस्ताव को नामंजूर करने का आग्रह किया, लेकिन सीएम ने कहा कि 13 में से 4 हैक्टेयर जमीन पर कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए इसे आवंटित कर देते हैं, बाकी जमीन के मामले में बाद में निर्णय लिया जाएगा। यह सुनते ही श्री सिंह ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने श्री दवे को जमीन आवंटित करने के कैबिनेट के फैसले की आलोचना की।

क्या है नर्मदा समग्र
नर्मदा नदी और उसके जलस्रोत को स्वस्थ, सुंदर और पवित्र बनाए रखने के एक प्रयत्न का नाम है नर्मदा समग्र। अमृत लाल बेगड़ की अध्यक्षता में गठित यह संस्था पिछले दो वर्र्षो से पुण्य सलिला के सभी पहलुओं पर काम कर रही है। इसी को लेकर फरवरी-2008 में अंतरराष्ट्रीय नर्मदा महोत्सव का आयोजन किया गया था।

क्या कहते हैं दवे
अनिल दवे का मानना है कि नर्मदा के मुद्दे पर राजनीति नहीं करूंगा, यह एक पवित्र कार्य है। जहां तक जमीन का सवाल है, तो संस्था निजी जमीन खरीदकर भी शोध कार्य करेगी। नदियों पर एक प्रतिशत काम होता है और सौ फीसदी राजनीति होती है, लेकिन नर्मदा नदी के संरक्षण का काम मेरे लिए एक भावनात्मक मामला है।





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