बुरहानपुर. पश्चिमी मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में शुक्रवार को भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि 17 लोग घायल हुए। इसके बाद समूचे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
इसके पहले यहां गांधी चौक क्षेत्र में उग्र भीड़ ने 20 से अधिक दुकानों में तोड़-फोड़ कर आग लगा दी। आंसू गैस के गोले व हवा में 15 से अधिक गोलियां दागने के बावजूद भीड़ के नियंत्रित न होने पर प्रशासन ने कफ्यरू लगा दिया।
पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया है। विवाद गुरुवार रात तब शुरू हुआ जब एक धार्मिक यात्रा के दौरान समुदाय विशेष के लोगों ने पथराव किया। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी तथा कड़ी सुरक्षा के बीच यात्रा पूरी की गई। शुक्रवार सुबह से व्यापारियों ने विरोध जताते हुए दुकानें बंद रखी थीं।
बीच, उत्तेजित भीड़ सड़कों पर निकल आई और पथराव व आगजनी शुरू हो गई। भीड़ ने 20 दुकानों के अलावा एटीएम व वाहनों में भी जमकर तोड़फोड़ की। हालात बेकाबू होते देख एसपी एमके कटकवार ने हवाई फायर के निर्देश दिए। भोपाल स्थित पुलिस हेडक्वार्टर ने तीन लोगों के मरने की पुष्टि की है। स्थिति नियंत्रित करने के लिए खंडवा, इंदौर, खरगोन व अन्य शहरों से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है।
नाकाम रही कोशिश: हिंसा शुरू होने पर सांसद नंदकुमारसिंह चौहान ने पुलिस के साथ मिलकर उपद्रवियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे। शुक्रवार तड़के खरगोन रेंज के डीआईजी जी. जनार्दन ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
छिंदवाड़ा के थांवरी में भी तनाव
अमरवाड़ा. यहां से 20 किमी दूर थांवरीखुर्द में रावण दहन के बाद हिन्दू धर्मिक ग्रंथ जलाने से तनाव फैल गया। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में बताई गई है। एसडीओपी समर वर्मा के अनुसार गांव में रावण को लेकर पिछले एक साल से विवाद चल रहा था। गड़बड़ी की आशंका के चलते अमरवाड़ा टीआई विनोद श्रीवास्तव को गांव भेजा गया था।
ग्रामीणों के बीच सुलह कराए जाने के बाद गुरुवार शाम रावण दहन हुआ। रात साढ़े बारह बजे के करीब पांच आदिवासियों ने दुर्गा पंडाल के सामने वाली सड़क पर जाकर एक प्रमुख हिंदू धार्मिक ग्रंथ को आग के हवाले कर दिया। एसडीओपी के अनुसार गांव के ही लोगों ने मौके पर पहुंच कर आग बुझाई। रात दो बजे टीआई और उसके बाद वे स्वयं पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। ग्रंथ जलाने वाले दयाली, बुधमान, शिववरण और अतरलाल को धारा 295ए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। ..शेष पेज 12 पर
एएसपी अमित सांघी ने बताया कि मामला संवेदनशील था इसलिए गांव में आदिवासी और डेहरिया समाज की अलग-अलग पंचायत बुलाई गई। डेहरिया समाज के लोगों का आरोप था कि आदिवासी रावण जलाने का विरोध कर रहे थे। वहीं दूसरी और आदिवासियों की बैठक में यह बात सामने आई कि गत वर्ष भजन मंडली में किसी डेहरिया युवक ने यह फब्ती कस दी थी कि रावण गौंड है। इसी बात को लेकर आक्रोश व्याप्त था।
पांचों आरोपियों ने भी इसी प्रकार की बात कही है। ग्रंथ जलाते समय आरोपी शराब के नशे में थे। पुलिस ने रवि शंकर डेहरिया के रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। सांघी का कहना है कि दोनों पक्षों को समझा बुझा कर शांत कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। टीआई श्रीवास्तव को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थिति पर नजर रखें।