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रावण दहन से पहले होता है मुंडन

उदयपुर. दशहरे पर दशानन के दहन से पूर्व सिंधी समुदाय में बच्चों के मुंडन संस्कार की परंपरा है। सिंधी समाज इसलिए रावण दहन का कार्यक्रम बड़े पैमाने पर करता है। देश में उदयपुर ऐसा नगर है जहां सिंधी समुदाय गत 61 सालों से दशहरे पर भव्य दशहरा उत्सव मनाता आया है।

समाज के संस्कृतिकर्मी दिनेश कटारिया के अनुसार अन्य शहरों में ऐसा उत्सव नहीं है लेकिन समुदाय में बच्चों का मुंडन जरूर करवाया जाता है और वह भी रावण दहन से पूर्व। वर्ष भर में जितने बच्चे जन्मे, उनका इसी दिन मुंडन संस्कार होता है। उदयपुर में इस दिन करीब 85 बच्चों का मुंडन हुआ।

यह मुंडन दशानन के मुख्य दहन स्थल गांधी ग्राउंड पर तो हुआ ही, सनातन धर्म मंदिर, जवाहरनगर, प्रतापनगर आदि में भी हुआ। इसके लिए क्षौरकर्ता को बुलाया गया और नेग आदि दिए गए। कहीं सामूहिक तो कहीं एकल रूप से बच्चों के केश उतरवाए गए। शक्तिनगर क्षेत्र में कुल 78 बच्चों का मुंडन हुआ। सभी घरों में व्यंजन बनाए, खाए और खिलाए गए।

जवाहरनगर युवा सेवा समिति के मोहन वाधवानी ने बताया कि वहां देवी प्रतिमा के विसर्जन के बाद में दस बच्चों का मुंडन करवाया गया। इस कारण ही क्षेत्र में आठ फीट का रावण का पुतला बनाकर जलाया गया। उसे राजीव साधवानी ने अग्नि दी। इससे पूर्व समिति ने हर वर्ष की भांति ही पंचायत के उपाध्यक्ष नंदलाल नारा को उनके सेवा कार्र्यो के लिए सम्मानित किया।





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