bhaskar Web English
HomeNewsMetrosIndore Indore

न जलेंगे दीये, न ही मनेगी दीपावली

इंदौर. पांच सौ बीघा जमीन को सिंचित करने वाले तालाब का पानी बहा दिए जाने के बाद सुमठावासियों ने जनहित याचिका लगाने का निर्णय लिया है। निराश किसानों का कहना है पानी के साथ उनकी खुशियां भी बह गई हैं। मवेशियों को तो बेचना ही पड़ेगा। इस बार उनके गांव में न तो दीये जलेंगे और न ही मनेगी दीपावली। मामले पर एक नजर..
देपालपुर से १६ किमी दूर सुमठा के तालाब का पानी २७ सितंबर को पटवारी और चौकीदारों की उपस्थिति में बहा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है यह सब एसडीएम के आदेश पर हुआ।

सरपंच पति बहादुरसिंह के अनुसार ऐसी मौखिक शिकायत हुई है कि तालाब के भरने पर पांच बीघा जमीन पर फसल नहीं हो पा रही थी। इसी के बाद एसडीएम के निर्देश के बाद तालाब का पानी खाली कर दिया गया। इस तालाब क्षेत्र के 300 से अधिक किसानों की पांच सौ बीघा जमीन की सिंचाई होती थी। यहां मछली पालन केंद्र भी चल रहा था और पानी के बहने के साथ ही मछली के बीज भी बह गए। आसपास पानी की दूसरी कोई भी व्यवस्था नहीं है, इसी कारण किसानों के सामने पूरे साल के इंतजार का संकट आ खड़ा हुआ है। फसलें सूख गई हैं और सब्र जवाब देने लगा है।

एसडीएम ने कहा था तत्कालीन सरपंच द्वारा इसकी ऊंचाई दो से ढाई फीट बढ़ा दी गई थी इससे आसपास की 20 से २५ बीघा जमीन प्रभावित हो रही थी। किसानों की शिकायत पर दो से ढाई फीट पानी खाली करवाया था। रात में किसी ने गेट खोलकर सारा पानी बहा दिया।

किसान मोतीराम पंवार, भुवानसिंह पंवार, वासुदेव पंवार, रमेश सिसोदिया, निलेश पंवार, लक्ष्मणसिंह पंवार, राजेंद्र पंवार, लालचंद पंवार, रतनसिंह हरेसिंह, अंबाराम पटेल सहित अन्य किसानों का कहना है गांव का रकबा 3000 बीघा का है। 300 किसानों के परिवार खेती पर ही आश्रित हैं। गांव में लगभग चार से पांच हजार मवेशी हैं उनके लिए भी पानी नहीं है। उनका कहना है हमारे तो दिल जल रहे हैं दीपावली मनाने की बात तो सोच भी नहीं सकते। उन्होंने बताया गांव के लोग दीये नहीं जलाएंगे और न ही मनाएंगे दीपावली। सरपंच पति बहादुरसिंह सहित अन्य किसानों ने बताया मामले को लेकर ग्रामीणों ने तय किया है कि वो जनहित याचिका लगाएंगे।

उनका कहना है यदि पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो किसानों को मवेशी बेचना ही पड़ेंगे। यह भी मांग है कि कलेक्टर मुआयना करें। किसानों का कहना है यहां प्रमुख तौर पर डॉलर चना ही लगाया जाता है इस मान से लगभग 70 से 80 लाख का नुकसान हुआ है इसकी भरपाई चाहिए। गांव वालों के पास इस बात का जवाब नहीं है कि मवेशियों व खेतों के लिए पानी आएगा तो कहां से।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

आपके विचार
jk
Wednesday, 15th Oct 2008, 6:14
unless the officers are charged for the losses...... this will continue. some one should be held responsible. media in perticular should help the villagers....... for compensation