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‘छोटों’ को तो होश ही नहीं

इंदौर. शेयर मार्केट की खस्ता हालत ने छोटे-बड़े निवेशकों को बर्बादी की कगार पर ला दिया है लेकिन चंद हजार रुपए की तीन किस्तों से म्युचुअल फंड के जरिये लाखों रुपए का सपना देखने वाले लाखों लोग फिलहाल इससे बेखबर ही हैं।

जिन्हें पता चल रहा है वे सकते में हैं। शहर सहित गांव और कस्बों में रहने वाले ज्यादातर निवेशकों को पता ही नहीं है कि उनकी जमा पूंजी बढ़ने के बजाये लगातार घट रही है। शेयर मार्केट संबंधित विभिन्न बीमा कंपनियों की पॉलीसियों से विश्वव्यापी मंदी के कारण मूल पूंजी से भी पैसा कम हो रहा है।

फरवरी 2006 के बाद जिन लोगों ने दो किस्तों में 10-10 हजार रुपए ही इन्वेस्ट किए थे वे फिलहाल डेढ़ से चार हजार रु. के घाटे में चल रहे हैं। शुक्रवार को इस घाटे में फिर इजाफा हुआ है। इसमें उन ग्राहकों को तगड़ा नुकसान है जिनकी कंपनी ने विदेशों में अपना इन्वेस्ट कर रखा है।

64 हजार रुपए से घटकर हुए 20 हजार
सुदामानगर निवासी नीतेश दीक्षित ने बताया मैंने 10 महीने पहले म्युचुअल फंड में 64 हजार रुपए इन्वेस्ट किए थे। उम्मीद थी अच्छा प्रॉफिट होगा लेकिन बाजार ने ऐसा खेल दिखाया कि आज की तारीख में करीब 45 हजार का घाटे में चल रहा हूं। निकट भविष्य में इससे उबरने की संभावना भी नहीं बची है।

60 हजार रुपए के हुए 13.5 हजार
मालगंज निवासी सुमित पालीवाल ने गत जनवरी माह में म्युचुअल फंड में 60 हजार रुपए इन्वेस्ट किए थे। विश्वव्यापी मंदी के चलते उनकी राशि 46 हजार रुपए से घटकर साढ़े 13 हजार रुपए रह गई है।

पूरे परिवार के लिए पांच पॉलिसी
एक बीमा कंपनी के एजेंट की बातों में आकर 10-10 हजार की पांच पॉलीसियां लेने वाले धार के तुकाराम अब पछता रहे हैं। उन्हें तीन साल तक सभी पॉलीसियों के लिए 10-10 हजार रु. की किस्त जमा करने का कहकर 15 साल बाद प्रति पॉलिसी 15 से 16 लाख मिलने का भरोसा दिलाया था। आज जब उन्हें पता चला कि पांच पॉलीसियों के लिए दो साल में उनके द्वारा जमा किए गए एक लाख रुपए की मूल पूंजी ही तेजी से घट रही है तो वे चिंता में डूब गए।

किसी ने तोड़ी एफडी तो किसी ने लिया उधार
एमपी स्टॉक मार्केट के योगेंद्र सुराणा कहते हैं छोटे निवेशकों में किसी ने एफडी तोड़कर तो किसी ने पीएफ, जीपीएफ की राशि से मार्केट में पैसा लगाया। सोना बेचकर व कर्ज लेकर म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले भी हजारों में हैं जिनकी।

रिटायरमेंट के बाद कई लोगों ने डाक विभाग की मासिक आय योजना से पैसा निकालकर एकमुश्त बीमा योजना में लगाया है। इसमें भी लोगों को घाटा हो रहा है। घर से रुपए लेकर 20-25 वर्ष की पौध ने तेजी से पैसा कमाने की खातिर खूब इन्वेस्ट किया। बाजार में उथल-पुथल का कारण यह भी है।

ऐसा करें..
>> अभी अच्छे शेयरों को बेचना नहीं चाहिएै, इसे दीर्घकालीन निवेश समझकर इंतजार करना चाहिए।
>> मजबूत आधार वाली कंपनियों में निवेश पांच साल के लिए करना ही फायदेमंद है।
>> अभी तक भारत में कोई भी फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट दिवालिया घोषित नहीं हुआ है यानी फंडामेंटल स्थिति मजबूत है।
>> विदेशों में भारतीय कंपनियों का इन्वेस्टमेंट बेहद कम है, इसीलिए इकोनॉमिक स्लो डाउन का असर तुलनात्मकरूप से कम होगा।
>> डाइवर्सिफिकेशन एक बहुउपयोगी टूल्स है और अनिश्चितता- अस्थिरता के खिलाफ मजबूत कवच भी। यह दीर्घकालीन जोखिम कम कर लाभ को सुनिश्चित करता है।
(अरिहंत कैपिटल के राजेश पालविया, मुनीश मालानी, कार्वी स्टॉक्स के ब्रांच हैड अंकित पटवा,स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की रिसर्च एनालिस्ट पिंकी वाधवानी से चर्चा के अनुसार)





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