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..जो है नाम वाला

‘मेरे पास आओ मेरे दोस्तो एक क़िस्सा सुनो’ बचपन में जब ये आवाÊा रेडियो पर गूंजती थी, तो हम रेडियो के क़रीब आ जाते थे। ये ‘मिस्टर नटवरलाल’ फ़िल्म का गाना था, जिसमें बाक़ायदा एक शेर से सामना करने की कहानी सुनाई गई है। अमिताभ बच्चन से जब इस गाने में बच्चा पूछता है ‘फिर क्या हुआ’ तो अमिताभ गाते हैं— ‘ख़ुदा की क़सम मजा आ गया, मुझे मारके बेसरम खा गया’।

बच्चा, ‘लेकिन आप तो Êिजदा हैं।’ अमिताभ— ‘अरे ये जीना भी कोई जीना है लल्लू।’ यक़ीन मानिए, इस अंतिम पंक्ति में अमिताभ की जो अदा है, उस पर हम मर मिटे थे। सवाल यह है कि वो कौन-सी चीज है, जो अमिताभ बच्चन को एक पसंदीदा अभिनेता होने के साथ-साथ एक पसंदीदा गायक भी बनाती है।

अगर हमें इस चीजकी पड़ताल करनी है, तो अमिताभ बच्चन के गाए सारे मशहूर गीत सुनने होंगे। ‘मिस्टर नटवरलाल’ में ये गीत अमिताभ से संगीतकार राजेश रोशन ने गवाया था। सन् 1979 में इस गाने के आने के ठीक दो साल बाद अमिताभ बच्चन का दूसरा मशहूर फ़िल्मी गीत आया फ़िल्म ‘लावारिस’ में। उस Êामाने में इस गाने पर अश्लीलता के आरोप लगे।

दरअसल, ये गीत अमिताभ के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने एक लोकगीत के आधार पर लिखा था और लोकगीतों में बहुधा पर्दा नहीं होता, ठेठ और सीधी बात होती है। ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’ पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुआ। अमिताभ बच्चन गायक नहीं हैं, उनसे Êाबर्दस्ती गवाया जाता है, लेकिन जब गाने का मौक़ा आता है, तो उसे वह पूरी गंभीरता से लेते हैं।

मुझे लगता है कि अमिताभ की गायकी के दो रूप हैं। एक वो रूप हंै, जिसमें उनके भीतर का ठेठ गंवईं व्यक्ति गुनगुनाता है। वो बिना किसी हिचक के, बिना अपनी आवाÊा की परवाह किए गाता है और अपनी गायकी में मÊो भी लेता है। इस रूप में उन्होंने Êयादातर लोकगीतों पर आधारित गाने गाए हैं। पर उनकी गायकी का दूसरा रूप है शहरी रूप, जिसमें उनसे बहुत अलग तरह के पॉलिश्ड क़िस्म के गाने गवाए गए हैं। ये आमतौर पर जÊबाती गीत हैं।

संवेदनाओं से भरे गाने हैं। जैसे रामगोपाल वर्मा की फ़िल्म ‘नि:शब्द’ के लिए अमिताभ ने मुन्ना धीमान का लिखा और विशाल भारद्वाज का स्वरबद्ध किया एक गीत गाया था—‘रोÊाना जिएं रोÊाना मरें, तेरी यादों में हम’। अफ़सोस ये है कि फ़िल्म के कथानक को लेकर उठे विवादों की वजह से ये गाना जनता तक उस तरह नहीं पहुंचा, जैसे पहुंचना चाहिए था।

हां, वो गाने Êारूर जनता तक पहुंचे, जो लाउड हैं, जिनमें ठेठ लोक-रंग है। अब तक हम ये मान चुके हैं कि अमिताभ बच्चन के भीतर एक ठेठ इलाहाबादी व्यक्ति मौजूद है, जिसे अवधी बोली से प्रेम है, इसके ख़ास उच्चारण और चलन से प्रेम है। इसमें शामिल है सन् 1981 में आई फ़िल्म ‘सिलसिला’ का होली गीत हो—‘रंग बरसे भीगे चूनर वाली रंग बरसे’। इसे भी डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने एक लोकगीत के आधार पर फ़िल्म के अनुरूप बनाया था और मशहूर संगीतकार जोड़ी शिव-हरी ने स्वरबद्ध किया था।

नई पीढ़ी की जानकारी के लिए बता दिया जाए कि मशहूर संगीतकार जोड़ी शिवकुमार शर्मा और मशहूर बांसुरीवादक हरिप्रसाद चौरसिया की जोड़ी शिव-हरी के नाम से संगीत देती है। फिर फ़िल्म ‘पुकार’ का राहुल देव बर्मन का स्वरबद्ध किया गीत याद आता है—‘तू मैक़े मत जईयो’। इसी तरह से फ़िल्म ‘बाग़बान’ में अमिताभ बच्चन ने ‘होरी खेलैं रघुबीरा’ बड़ी ही अदा के साथ गाया है।

दशहरे और दीपावली के बीच के इन दिनों में मुझे याद आ रही है वो ‘रामलीला’ जिसे अमिताभ ने फ़िल्म ‘अक्स’ में गाया था। कविता मूंदड़ा नामक बच्ची इस गाने में गाती है—‘हट जाओ रावण मारूंगी बाण’ और अमिताभ रावण बनकर खेल-खेल में अट्ठहास करते हैं। इस गाने को खोजकर Êारूर सुनिएगा।

इससे भी पहले के दिन याद कीजिए जब बाली सग्गू ने अमिताभ बच्चन के साथ एक अलबम जारी किया था ‘एबी बेबी’। इसमें बच्चन साहब ने अपने पिता के रचे या सुझाए कुछ लोकगीत गाए थे। ये सभी ऐसे गाने हैं, जिनमें लोकगीतों का रंग है और इसमें अमिताभ बच्चन को बड़ा मÊा आता है। अमिताभ ने अपने पिता की मशहूर कृति ‘मधुशाला’ का पाठ भी किया है।

हम यहां अमिताभ बच्चन के गाए सारे गानों का Êिाक्र नहीं कर रहे हैं। फिर भी उन गानों का Êिाक Êारूरी है, जिनमें अमिताभ की गायकी का शहरी रूप नÊार आता है। ऐसा पहला गाना फ़िल्म ‘सिलसिला’ में ही था— ‘नीला आसमां’। उनींदी रातों के नग़मों की फेहरिस्त में हमेशा इस गाने का Êिाक्र होता है। इसके अलावा इसी फ़िल्म में अमिताभ ने ‘ये कहां आ गए हम’ के बीच में जो पंक्तियां पढ़ी हैं, वो किसी भी वॉयस आर्टिस्ट का आत्मविश्वास डगमगाने के लिए काफ़ी हैं। फिर फ़िल्म ‘बाग़बान’ का ही गाना है—‘मैं यहां तू वहां Êिादगी है कहां’। इस गाने को सुनकर मैंने स्वयं कई लोगों को Êार-Êार आंसू बहाते देखा है। दरअसल अमिताभ जो भी करते हैं Êयादातर अच्छे ही लगते हैं। अपने इस प्रिय अभिनेता को हम जन्मदिन की शुभकामनाएं पेश करते हैं।

(लेखक विविध भारती में कार्यरत हैं)





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