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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. बाजार की उथलपुथल से सबसे ज्यादा असर मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग क्षेत्र के रोजगारों पर पड़ेगा। एमबीए और इंजीनियरिंग कालेजों के कैम्पस सिलेक्शन में विदेशी कम्पनियां कम आना शुरु हो जाएंगी।
बाजार से खासकर बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस सेक्टर व भारतीय सूचना तकनीक उद्योग प्रभावित हुए हैं। एक आकलन के अनुसार वित्त और इंश्योरेंस क्षेत्र में नौकरियों में भारी कमी आएगी।
क्यों आई ऐसी स्थिति
अमेरिका की वित्तीय कंपनियों ने एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में ऊंची ब्याज दरों पर खरबों डालर का कर्ज ऐसे लोगों को दे दिया जो वापस करने की स्थिति में नहीं थे। जब पैसा वापस नहीं मिला तो बैंक दिवालिया होते चले गए। घाटा पूरा करने के लिए इन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर दिया जिससे यहां के बाजार में गिरावट शुरू हो गई।
कैसे गिरता है बाजार
बाजार में जब किसी कंपनी के शेयर भाव कम हो जाएं तो इसे बाजार में गिरावट माना जाता है ऐसा तब होता है जब शेयर की मांग घटे और बिकवाली बढ़ जाए।
कर्मचारियों के वेतन पर पड़ेगा असर
जिन कंपनियों के शेयर भाव नीचे आ रहे हैं उनकी पूंजी लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में कंपनियां अब आगे कम निवेश करेंगी या फिर अपने कर्मचारियों का वेतन भी कम कर सकती हैं।
बेकार हो जाएगी दीपावली
बाजार की इस मंदी का असर दीपावली की खरीदारी पर भी पड़ेगा। निवेशकों को जो घाटा उठाना पड़ रहा है उसके कारण त्योहारों पर महंगे आयटम्स की खरीदारी कम होगी।
नए इश्यू नहीं आएंगे
वित्तीय क्षेत्र में सक्रिय भारतीय कंपनियों पर असर पड़ेगा। ये कंपनियां मैनेजमेंट संस्थानों से कम लोगों की भर्ती करेंगी। बाजार में नए इश्यू नहीं आएंगे यानि वही खाते सही करने, कंपनियों के विलय व मार्केटिंग का काम बंद हो जाएगा।
विकास भी होगा प्रभावित
बाजार की मंदी से विकास भी अछूता नही रहने वाला। विकास परियोजनाएं भी इससे बुरी तरह प्रभावित होंगी। उदाहरण के लिए रियल इस्टेट क्षेत्र की अगुआ कंपनियां डीएलएफ, यूनिटेक और अंसल्स प्रापर्टीज में काफी विदेशी पूंजी लगी है अब इन कंपनियों को नई परियोजनाओं के लिए पूंजी मिलना कठिन हो जाएगा।
ग्वालियर की स्थिति
शेयर मार्केट में ग्वालियर की स्थिति का आकलन किया जाए तो यहां लगभग 10 हजार लोग सीधे इस कारोबार से जुड़े हैं। इसके अलावा लगभग 10 हजार निवेशक ऐसे भी हैं जो मार्केट में कम पूंजी लगाकर कभी कभार ही निवेश करते हैं। मार्केट में 70 से 80 टर्मिनल काम कर रहे है जिसमें प्रत्येक 100 से 500 तक निवेशक जुड़े हैं। इसके अलावा कोमोडिटी काउन्टर भी हैं।
एक्सपर्ट कमेंट्स
शेयर मार्केट विशेषज्ञ धर्मेन्द्र मेहता का कहना है कि जब भी बाजार गिरता या उठता है तो उसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। वर्तमान मंदी के दौैर में शेयर का वेट घटता जा रहा है रेट इतने गिर गए हैं कि बाजार में खरीदार नही बचा है व बेचने वाला बेचता जा रहा है। बाजार को मजबूत रखने के लिए उसमें लिक्विडिटी यानि तरलता होना आवश्यक है। निवेशक बिकवाली के साथ खरीदारी भी करें।