जयपुर. जोधपुर के मेहरानगढ़ के चामुंडा माता मंदिर हादसे के एसएमएस अस्पताल में भर्ती दो मरीज अभी भी हादसे वाली सुबह को नहीं भूले हैं।
मेडिकल आईसीयू में भर्ती महेश (21) को जब भी हादसे की याद आती है, वह बेहोश हो जाता है। उसके परिजनों ने शुक्रवार को बताया कि महेश बार-बार ‘मुझे बचा लो, मुझे बचा लो’ शब्द दोहराता रहता है।
पॉलीट्रोमा वार्ड में भर्ती वीरेंद्र बुनकर (27) कैसेट की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वीरेंद्र ने बताया कि हादसे वाले दिन वह सुबह चार बजे दर्शन के लिए लाइन में लगा हुआ था कि अचानक पीछे से धक्का लगा और बैरिकेड्स टूट गए, जिससे वहां भगदड़ मच गई।
दर्जनों लोग भीड़ के पैरों तले कुचलने पर मदद के लिए चिल्लाने लगे। मैं भी सहायता के लिए चिल्लाया, लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि काफी संख्या में लोग बेसुध पड़े हैं। चारों ओर चीख-पुकार मची है। एक लड़के की जीभ बाहर निकली हुई थी। उसकी मौत देख मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैं बेहोश हो गया। होश आने पर मैंने स्वयं को महात्मा गांधी अस्पताल में पाया। हादसे का ख्याल आते ही कांपने लगता हूं।