जयपुर. किराए की कोख से जन्मी माझी के लिए ढाई महीने बाद भी जापान जाने की राह तैयार नहीं हो पाई है। माझी का पासपोर्ट नहीं बनने से उसे न तो ट्रैवल वीजा मिल सकता है और न ही कोई कागजात। पासपोर्ट अधिकारी इस बच्ची का पासपोर्ट बनाने से बच रहे हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को कहा था कि अगर माझी को जापान जाना है तो पासपोर्ट व वीजा आदि के लिए सक्षम अधिकारी के पास जाकर आवेदन करें। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद माझी की 70 वर्षीया दादी इसिको यामादा को गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की ओर से पासपोर्ट कार्यालय में संपर्क करने की हिदायत मिली थी।
जयपुर में माझी के अभिभावक कमल विजयवर्गीय के यहां ठहरी इसिको यामादा शुक्रवार को जयपुर पासपोर्ट कार्यालय गई तो उन्हें सोमवार को आने की बात कहकर लौटा दिया गया। कमल विजयवर्गीय के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से मामले को सक्षम अधिकारी से निबटाने की बात पर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और विदेशी मामलात के संबंधित अधिकारियों की ओर से पासपोर्ट कार्यालय में ट्रैवल डाक्यूमेंट या पासपोर्ट के लिए संपर्क करने की बात कही गई थी, लेकिन जयपुर पासपोर्ट कार्यालय से कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उधर, जापान सरकार की ओर से पासपोर्ट और ट्रैवल वीजा मिलने पर ही माझी को जापान जाने की अनुमति मिलेगी। इस बीच इसिको यामादा की वीजा अवधि 25 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। वह इससे पहले ही पूरी कार्रवाई करके माझी को अपने साथ ले जाने पर अडिग है।
स्पष्ट कानून नहीं, माझी की अपील सुप्रीम कोर्ट में
जैविक रूप से जापानी पिता ने यहां किराए की कोख ली थी और उससे अहमदाबाद में 25 जुलाई 2008 को माझी का जन्म हुआ था। इस दौरान अहमदाबाद में बम धमाकों से माहौल बिगड़ता देख माझी के पिता उसे जयपुर निवासी दोस्त कमल विजयवर्गीय के यहां ले आए।
इसके बाद जैसे ही उन्होंने माझी को स्वदेश ले जाने की बात शुरू की तो मामला उलझता गया। यह अपने तरह का पहला ऐसा मामला है, जिसके लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है। इस बीच एक एनजीओ की ओर से यह मामला हाई कोर्ट में और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को आदेश देकर सक्षम अधिकारी को मामले पर कार्यवाही की बात कही।