वेटिकन सिटी/ कोट्टायम/ नई दिल्ली.
चारों तरफ लहराते तिरंगे के बीच वेटिकन में रविवार को ईसाई धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट 16वें ने जैसे ही केरल में जन्मी नन सिस्टर अलफोंसा को संत घोषित किया, दुनियाभर में रहने वाले भारतीय रोमन कैथोलिक समुदाय ने खुशी का इजहार किया।
केरल सहित देश के सभी प्रमुख शहरों में पहली भारतीय संत मिलने के मौके पर गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं की गईं। मुख्य समारोह वेटिकन सिटी में हुआ जिसका सीधा प्रसारण दुनियाभर के साथ संत अल्फोंसा के गांव तथा उनकी समाधि के पास जमा सैकड़ों लोगों ने भी देखा।
भारत व अन्य देशों से वेटिकन पहुंचे भारतीय ईसाइयों सहित हजारों लोग पीटर्स चौक पर हुए इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बने। भारत के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नाडीज तथा केरल के मंत्री भी अनेक बिशपों व कार्डिनलों के साथ मौजूद थे।
सिस्टर अल्फोंसा कोट्टायम जिले के भरनांगणम गांव में जन्मी थीं और महज 36 वर्ष की आयु में 1946 में उनका देहावसान हो गया था।
बाइबल से पाठ : पोप बेनडिक्ट ने इस मौके पर बाइबल से पाठ पढ़ने के साथ ही सिस्टर अल्फोंसा की जीवनी पढ़ कर सुनाई। पोप ने कहा हमें संतों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
ईसाइयों के साथ हैं पोप :
ईसाइयों के विश्व धर्मगुरु पोप ने समारोह के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि ‘मेरी दुआ संकट की घड़ी में भारत के ईसाइयों के साथ है। उनका इशारा उड़ीसा व कर्नाटक में ईसाई समुदाय पर हो रहे हमलों की ओर था।
चमत्कार ने बनाया संत :
सिस्टर अल्फोंसा को संत बनवाने में उनके द्वारा किए गए चमत्कारों का योगदान रहा। इनमें से एक चमत्कार एक बच्चे के साथ हुआ बताया गया है जिसके मुड़े हुए पैर कोट्टायम जिले के भरनांगणम स्थित सिस्टर अल्फोंसा की समाधि पर प्रार्थना करने से ठीक हो गए।
पोप जॉन पॉल द्वितीय ने किया था धन्य घोषित :
सिस्टर अल्फोंसा को पोप जॉन पॉल द्वितीय ने अपनी भारत यात्रा के दौरान धन्य घोषित किया था जो संत बनने की प्रक्रिया का पहला चरण है।
ये भी थे प्रतिनिधिमंडल में :
वेटिकन पहुंचे भारतीय प्रतिनिधिमंडल में ऑस्कर फर्नाडीज के साथ केरल के पीडब्ल्यूडी मंत्री मोंस जोसेफ, सांसद पीसी थॉमस, केरल के पूर्व वित्तमंत्री केएम मणि, विधायक पीसी जॉर्ज, केवी थॉमस, मेघालय के पूर्व राज्यपाल एमएम जैकब, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर जेंसी जेम्स शामिल थे।