मुंबई. वैश्विक मंदी के चलते देश के म्यूचुअल फंड कारोबार में नकदी का संकट पैदा हो गया है। समस्या से निपटने के लिए फंडों ने रिजर्व बैंक से थोड़ी अवधि के लिए कर्ज मांगा है।
रिजर्व बैंक कर रहा विचार :
सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक म्यूचुअल फंडों से अल्पावधि के कर्ज की राशि जमा करवाकर उन्हें इसके बदले नकदी देने की योजना पर विचार कर रहा है। केंद्रीय बैंक रीपरचेज की सुविधा आमतौर पर बैंकों और प्रायमरी डीलर्स को ही देता है।
महंगा हुआ अंतरबैंकीय कर्ज :
वित्तीय संकट से पूरा मुद्रा बाजार परेशान है। दुनियाभर के बैंक एक-दूसरे को कर्ज देने से बिदक रहे हैं। इसके चलते अंतर बैंकीय कर्ज की दर रातों-रात १९ माह के सर्वोच्च शिखर (२३ फीसदी) पर पहुंच गई है। इसके विपरीत रिजर्व बैंक की अल्पावधि की दरें नौ फीसदी हैं।
सेबी ने मांगा विवरण :
बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड कंपनियों से डिपाजिट का प्रमाण-पत्र (सीडी) मांगा है। इन आंकड़ों के आधार पर ही रिजर्व बैंक इन कंपनियों की मांग पूरी कर पाएगा।