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बाजार के रास्ते भारत पहुंच सकता है संकट : रिजर्व बैंक

वाशिंगटन/लंदन. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चेतावनी दी है कि शेयर बाजार व विदेशी मुद्रा बाजार के रास्ते वैश्विक वित्तीय संकट भारत पहुंच सकता है। साथ ही कहा है कि मंदी के अप्रत्यक्ष असर से मुद्रा, डेट व कर्ज बाजार भी सुरक्षित नहीं हैं।

फिर भी कम रहेगा असर :

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं वित्त समिति की बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि शेयर व विदेशी मुद्रा बाजार के कारण अंतरराष्ट्रीय संकट के भारत पहुंचने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। भारत इससे अत्यंत बुरी तरह प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजार के तीनों हिस्से (मुद्रा, डेट व पूंजी बाजार) अप्रत्यक्ष रूप से इससे प्रभावित हो सकते हैं।

बढ़ गई कर्ज की लागत :

सुब्बाराव ने कहा कि मुद्रा बाजार में ठहराव के चलते भारतीय कंपनियों की कर्ज की लागत बढ़ गई है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तरलता का संकट पैदा हो गया है, जिससे निकट भविष्य में देश के भीतर कर्ज की अतिरिक्त मांग पैदा होने की संभावना है।

पूंजी प्रवाह व निर्यात पर असर :

उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं वित्तीय संकट से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही हैं। इनमें निवेशकों का रुझान घट रहा है, जिससे पूंजी प्रवाह पर खासा असर पड़ सकता है। मंदी से भारतीय निर्यात को धक्का लगेगा।

‘घरेलू म्यूचुअल फंडों में नकदी का संकट’ शीर्षक से एक अन्य खबर नीचे है।)
- कर्ज की लागत बढ़ने से परेशान घरेलू कंपनियां

तेज हो सकता है असर ‘ उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक मंदी के असर को मामूली नहीं आंका जा सकता। आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता बढ़ सकती है।’
-डी सुब्बाराव, गवर्नर, आरबीआई





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