लीडरशिप मंत्र. यदि आपने चेस खेला है तो इस बात पर गौर किया होगा कि शुरुआती चरणों में जब आप खेल सीख रहे थे, आपका ज्यादातर ध्यान विपक्ष पर हमला करने पर लगा रहता था और कदाचित ही अपनी सेना बचाने पर ध्यान देते थे।
ऐसे में अक्सर गेम का नतीजा आपकी हार के रूप में होता और तब आपको लगता- ‘अरे! ये मैंने क्या कर दिया?’ शुरुआत में बार-बार गेम हारने के बाद आप धीरे-धीरे इस खेल की बारीकियों को समझते हुए विरोधी पर हमला करने की कला सीख जाते हैं।
यदि आप सम्राट अशोक के जीवन का इतिहास देखें, तो आपको पता लगेगा कि शुरुआत में अपना पराक्रम दर्शाने के लिए वह दूसरे राज्यों को जीतने में लगे थे। यह कलिंग युद्ध के बाद का परिदृश्य ही था जिसमें जलते हुए घर, इधर-उधर बिखरी लाशें देखकर वे पूरी तरह टूट गए और उन्होंने यह महसूस किया कि ‘ये मैंने क्या कर दिया?’ इसके बाद वे लोक-कल्याण के कामकाज में जुट गए।
हम में से ज्यादातर लोग गलती के बाद सोचते हैं कि मुझे यह नहीं करना चाहिए था, लेकिन जीवन में रिवाइंड का बटन नहीं होता कि हम पीछे जाकर अपनी गलतियों को सुधार लें। लीडर के तौर पर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी काम को करने से पहले इस बात का हमेशा अच्छी तरह विश्लेषण करें कि इसके क्या नतीजे होंगे।
अपने लक्ष्य की राह में आने वाली समस्याओं को पहले ही जान लेना बेहतर है। वैसे यह भी सही है कि आप अपने लक्ष्य की पूरी राह नहीं जानते होंगे और सब कुछ जानना संभव भी नहीं है। आपको अपनी अंत:प्रेरणा के आधार पर भी कुछ खास कदम उठाने की जरूरत है। प्रत्येक चरण पर अपने कामकाज का मूल्यांकन करें ताकि आप खुद को सुधार सकें और बाद में उलझनों भरी परिस्थितियों से बचे रहें।
-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था ‘लीडकैप’ के संस्थापक हैं।