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प्रोफेसरों की होगी बल्ले-बल्ले

भोपाल. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अगर वेतन पुनरीक्षण समिति की अनुंशासाएं मंजूर कर लीं तो प्रोफेसरों का वेतन भी निजी कंपनियों के मैनेजर्स के समान हो जाएगा। इसमें कुलपति का वेतन 80 हजार और प्रोफेसर का 39 हजार रु. मासिक तक हो सकता है। सिफारिशों के अनुसार विशिष्ट प्रोफेसरों के नए पद भी सृजित किए जा सकते हैं, जिनका वेतन 80 हजार रु. मासिक तक होगा।

यूजीसी की वेतन पुनरीक्षण समिति ने अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंप दी है। समिति ने उच्च शिक्षा के लगभग सभी पदों में ढाई से तीन गुना वेतनवृद्धि की सिफारिश की है। नई व्यवस्था में व्याख्याता का पद नाम सहायक प्राध्यापक करने की सिफारिश भी की गई है।

अगर आयोग समिति की अनुशंसाओं को लागू करता है तो सहायक प्राध्यापक का वेतन 8000-13500 से 15600-39100 और प्राध्यापक का वेतन 16400-22400 से 37400-67000 रु. हो जाएगा। हालांकि तीन माह पहले समिति के सामने प्रदेश के शिक्षकों ने पांच गुना वेतन बढ़ाने की मांग की थी। वेतन पुनरीक्षण समिति ने करीब छह माह तक कई राज्यों का दौरा कर वहां की उच्च शिक्षा के हालात जानने के बाद अपनी अनुशंसाएं की हैं। समिति ने माना है कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने और नई पीढ़ी के विद्वानों को शिक्षण कार्य के लिए आकर्षित करने के लिए वेतन को आकर्षक स्तर तक बढ़ाया जाना जरूरी है।

केंद्र सरकार उठाएगी भार: उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सिफारिशों को लागू करने से आने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार को 100 प्रतिशत तक वहन करने की मंजूरी दे दी है। केंद्र से राज्यों को यह अतिरिक्त राशि अगले पांच साल तक दी जाएगी। इसके बाद के पांच सालों में केंद्र से इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जाएगा।

तीन नए पद होंगे: समिति की रिपोर्ट में तीन नए पदों की सिफारिश की गई है। इसमें सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर 15600-39100, सीनियर प्रोफेसर 37400-67000 और प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस 80000 रु. मासिक वेतन पर होंगे। कॉलेजों के लिए इन नए पदों की सीधी भर्ती के लिए मंजूर किया जा सकेगा।

इसके साथ ही कैरियर एडवांस स्कीम के तहत शिक्षकों को पदोन्नति से भी सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर बनाया जा सकेगा, जबकि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की पदोन्नति के लिए सीनियर प्रोफेसर का पद रखा जाएगा। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय प्रोफेसरों ने मौजूदा व्यवस्था में 20 से 25 साल तक एक ही पद पर रहने की स्थिति की शिकायत की थी। प्रोफसर ऑफ एमिनेंस का पद विश्वविद्यालयों के लिए होगा। इस पद के अधिकारियों पर उद्योग जगत से समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी होगी।

सभी के लिए बढ़ोत्तरी: समिति की सिफारिशों में जहां वेतन भत्तों में बढ़ोत्तरी के साथ सेवा शर्तो में भी बदलाव की सिफारिशें की गई हैं, वहीं प्रोफेसर श्रेणी में तीन नए पदों की सिफारिश भी की है। समिति ने शिक्षकों, लाइब्रेरियंस, शारीरिक शिक्षा निदेशकों और अन्य अकादमिक स्टाफ की वेतन संरचना को अपने कार्यक्षेत्र में शामिल किया है। शिक्षकों की नियुक्ति के समय दी जाने वाली वेतनवृद्धियों में भी समिति ने दिल खोलकर उदारता बरती है। दो से पांच तक अग्रिम वेतनवृद्धि दिए जाने को कहा गया है, जिन्हें योग्यता डिग्रियों के आधार पर तय किया जाएगा।

तीन नए पद होंगे
समिति की रिपोर्ट में तीन नए पदों की सिफारिश की गई है। इसमें सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर 15600-39100, सीनियर प्रोफेसर 37400-67000 और प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस 80000 रु. मासिक वेतन पर होंगे। कॉलेजों के लिए इन नए पदों की सीधी भर्ती के लिए मंजूर किया जा सकेगा। इसके साथ ही कैरियर एडवांस स्कीम के तहत शिक्षकों को पदोन्नति से भी सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर बनाया जा सकेगा, जबकि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की पदोन्नति के लिए सीनियर प्रोफेसर का पद रखा जाएगा। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय प्रोफेसरों ने मौजूदा व्यवस्था में 20 से 25 साल तक एक ही पद पर रहने की स्थिति की शिकायत की थी। प्रोफसर ऑफ एमिनेंस का पद विश्वविद्यालयों के लिए होगा। इस पद के अधिकारियों पर उद्योग जगत से समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी होगी।

संतान शिक्षा भत्ता भी
कॉलेज और विश्वविद्यालय शिक्षकों के दो बच्चों के लिए एक हजार रु. महीना प्रति संतान शिक्षा भत्ते की सिफारिश भी की गई है। वहीं हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाले दो बच्चों के लिए यह राशि तीन हजार रु. की जाएगी।

स्वाध्ययन के लिए भी
समिति ने शिक्षकों को स्वयं की योग्यता बढ़ाने शैक्षिक भत्ता देने को भी कहा है। इसमें सहायक प्राध्यापक को 1500 रु. प्रतिमाह और सह प्राध्यापक को 1200 रु. प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई है। गौरतलब है कि समिति के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षकों की इस मांग की सराहना की थी। दरअसल शिक्षकों ने इंटरनेट का खर्च और जर्नल्स आदि की कीमतें ज्यादा होने की वजह से यह मांग की थी।

उच्च शिक्षा पर प्रमोशन भी
पीएचडी होने पर सहायक प्राध्यापक को पांच वेतनवृद्धि और एमफिल होने पर तीन वेतनवृद्धि से नवाजा जाएगा। वहीं नेट-स्लेट धारकों को दो वेतनवृद्धि दी जाएगी। ज्यादा अनुभव, उच्च स्तरीय पत्र प्रकाशन होने पर चयन समिति पांच से सात तक अग्रिम वेतनवृद्धि की सिफारिश भी कर सकती है।





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