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‘हम सीमा पर मां की गोद में लेटे हैं’

इंदौर. सियागंज में शनिवार रात हास्य कवि सम्मेलन में खूब रंग जमा। देशभर से आए कवियों ने एक से बढ़कर एक काव्य पाठ किया। सम्मेलन में एक ओर जहां हास्य व्यंग्य सुनकर श्रोता लोटपोट हो गए वहीं देशभक्ति का जज्बा भी जगा और वंदे मातरम् भी गूंजा।

सियागंज के नवशक्ति श्रमिक संघ द्वारा आयोजित सम्मेलन की शुरुआत रात 10 बजे हुई। शुरुआत गोविंद राठी के काव्यपाठ से हुई। इसके बाद ब्रजेंद्र चकोर, सबीहा असर, गोविंद राठी, श्याम अंगारा, नरेंद्र ठाकुर और अतुल ज्वाला जैसे कवियों ने कविताएं सुनाईं। रात गहराने के साथ लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया और उपस्थिति भी।

हलकी सर्दी होने के बावजूद लोग जुटे रहे। सुबह चार बजे सम्मेलन का समापन जगदीश सोलंकी ने ‘आप सुनते हुए जब जुदा हो गए, हम सुनाते हुए अलविदा हो गए, फर्क ऐसा रहा, रसम ऐसी रही, हम पुजारी रहे तुम खुदा हो गए।’ पंक्तियों से सम्मेलन का समापन किया। आयोजक इंदर सोनकर और उनके साथियों ने कवियों का स्वागत किया

‘मोहब्बत करते हैं..’
कवयित्री सबीहा असर ने ‘मोहब्बत करते है हम इश्क को रूसवा नहीं करते, किसी से प्यार करते हैं तो फिर धोखा नहीं करते’ शेर कहकर बैठना चाहा तो श्रोताओं ने और कविताएं सुनाने की बात कही। इसके बाद और कविताएं सुनाई।

.. मां से कहना
कवि जगदीश सोलंकी ने देशभक्ति की अलख जगाते हुए कहा सरहद पर मौजूद सैनिक अपने मित्रों को कहता है ‘मां से कहना कि हम सीमा पर मां की ही गोद में लेटे हैं, और पिता से कहना मेरी उम्र का हर नौजवान उनका बेटा है।’

‘तो ये गोला पैदा नहीं होता’
कवि अतुल ज्वाला ने कहा आतंकवाद का उस समय हमने सही-सही प्रतिकार किया होता तो ईंट का ईंट से और गोली का गोली से जवाब दिया होता तो आज ये गोला पैदा नहीं होता।

..भारत माता की तस्वीर होना चाहिए
राजगढ़ के कवि नगेंद्र ठाकुर ने कहा ‘दिल में भारत माता की तस्वीर होना चाहिए..’ ब्रजेंद्र चकोर आगरा ने हास्य कविताएं पढ़ी, जिसे सुनकर लोग हंस-हंस कर लोटपोट हो गए।





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