bhaskar Web English
HomeNewsChhattisgarhRaipur Raipur

अपने ही नहीं पहचान पा रहे ‘उसे’

कोरबा. पिछले छह माह मेघना सूबेदार के लिए कितनी यातना भरे होंगे, इसका एहसास उसकी हालत देखकर लगाया जा सकता है।

छह माह की गुमनामी के बाद जब वह अपनों के सामने आई तो वे भी उसे पहचान नहीं पाए। उसकी आवाज ही उन्हें बता रही थी कि सामने बैठी दीन-हीन लड़की उनकी अपनी मेघना ही है। डा. मोहन सूबेदार अपनी लड़की मेघना को साथ लेकर रविवार की सुबह पुणो से हवाई जहाज द्वारा नागपुर पहुंचे।

मुंबई-हावड़ा मेल में वे बिलासपुर तक आने के बाद वहां से कार द्वारा शाम को वे जमनीपाली पहुंचे। घर पहुंचते ही उसकी प्रतीक्षा में पथराई आंखों में उसके मिलने से आई खुशी की चमक लिए मां डा. अंजलि सूबेदार व दादी ने उसे गले से लगा लिया। आंखों से आंसू बह निकले। वे खुश थे कि मेघना सुरक्षित लौट आई, पर उसकी बुरी हालत देखकर कहीं दर्द का एहसास भी था। मीडिया व कुछ परिचित डा. सूबेदार के घर रात ८ बजे पहुंचे, तब उन्होंने कहा मेघना थक गई है, वह गहरे सदमे में भी है। फ्रेश होकर वह सो गई है। साईंबाबा ने हमारी दुआ कबूल की, वह लौट आई इससे बड़ी खुशी की कोई और बात हमारे लिए नहीं है।

किसी ने नहीं की मदद..
मेघना के लापता होने की गुत्थी उलझती जा रही है। 11 अप्रैल को बेंगलुरु से फ्लाइट द्वारा मुंबई पहुंचने के बाद वह लापता हो गई। पिता डा. मोहन सूबेदार से उसने कहा था कि वह ‘गीतांजलि’ से बिलासपुर पहुंच रही है, जहां उसे लेने आ जाएं। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह उस दिन ‘गीतांजलि’ में सवार हुई भी या नहीं।

मेघना शुक्रवार को पुणो में प्रगट हुई। उसने पिता को फोन किया, तो उन्होंने उसे वहीं कोथरूड क्षेत्र में स्थित विश्व बिल्डिंग संकल्प को-आपरेटिव सोसायटी निवासी मामा विनायक करकरे के घर जाने कहा। मेघना को विनायक व उनकी पत्नी संगीता पहचान ही नहीं पाए। आवाज से उन्होंने उसे पहचाना।

श्रीमती संगीता ने कहा मेघना ने उन्हें बताया कि उसे केवल इतना याद है कि वह ट्रेन में इधर-उधर घूमती रही। लोगों ने उससे काफी बुरा बर्ताव किया। खाना खाने के लिए उसे भीख तक मांगनी पड़ी। किसी ने उसकी मदद नहीं की। उनका यह भी कहना है कि वह उन्हें भी ठीक से नहीं पहचान पाई, जबकि वह बचपन से मुझे जानती है। हालांकि विनायक को उसने पहचान लिया। शुक्रवार की शाम 7.30 बजे खाना खाने के बाद वह जिस गहरी नींद में सोई उससे ऐसा लगा, मानो छह माह बाद उसे चैन मिला हो। उसकी हालत देखकर साफ होता है कि उसकी जिंदगी के ये छह महीने काफी यातना भरे रहे हैं।

उसके हाथ-पैर में चोट के निशान भी हैं। इधर एटीएस मुंबई ने इस मामले की जानकारी सीएसटी रेल पुलिस मुंबई, गोवा पुलिस और पुणो से ली है। एटीएस को संदेह है कि कहीं सॉफ्टवेयर इंजीनियर मेघना इन छह महीनों के दौरान किसी आतंकवादी संगठन के कब्जे में तो नहीं थी। यह संदेह इसलिए है, क्योंकि पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले में जो संदेही या आरोपी पकड़े गए हैं या जिनकी तलाश है उनमें करीब आधा दर्जन सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे हैं। और तो और उनका संबंध पुणो, मुंबई व बेंगलुरु से भी रहा है।

डा. मोहन सूबेदार ने सीएसटी रेल पुलिस जहां उन्होंने अपनी बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, से कहा है कि वे फिलहाल कोई और कम्पलेंट दर्ज कराना नहीं चाहते। पुलिस सूत्रों के अनुसार मेघना के मेडिकल परीक्षण के लिए भी कहा था, पर इससे भी उन्होंने इंकार कर दिया। मेघना की अभी जो हालत है, उसे देखते हुए यह नहीं लगता कि वह बीते छह माह में उसके साथ क्या कुछ घटित हुआ उसे जल्द पिरो पाएगी। उसके ठीक होने के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिर उसके साथ हुआ क्या था।

अनसुलझे सवाल
>> मेघना के लौटने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि २५ जून को गोवा के कलंगुट बीच पर मिली लाश किसकी थी?
>> मेघना की तरह ही गोवा में मिले युवती के क्षत-विक्षत शव के कॉलर बोन पर फ्रेक्चर, बांह पर टेटू का निशान, पेट में मेघना जैसे ही फाइब्रोसिस का पाया जाना क्या महज एक संयोग था?
>> मेघना का मोबाइल भी उसी स्थान के पास मिला, जहां से उक्त युवती का अज्ञात शव क्या यह भी केवल एक संयोग था, या फिर कोई यह स्थापित करना चाहता था कि लापता मेघना अब मर चुकी है ?
>> मेघना की याददाश्त यदि मुंबई में ही खो गई थी तब उसने १३ अप्रैल को मुंबई के एक एटीएम व उसके बाद १५ अप्रैल को पणजी गोवा के एटीएम से अपना कार्ड ऑपरेट कर रुपए कैसे निकाले? एटीएम के सीसी टीवी कैमरे में कैद तस्वीर में वह भयभीत, पर स्वस्थ नजर आ रही है?
>> यदि मान लिया जाए कि मेघना तब किसी के कब्जे में थी तो फिर उसने अपने एटीएम से पहले पांच, फिर केवल दस हजार रुपए ही क्यों निकाले जबकि उसके एकाउंट में ६५ हजार रुपए थे?
>> उसका गोवा पहुंचना और जैसा कि बताया जा रहा है वैसे सिर पर किसी के ईंट मारने से याददाश्त का वापस आना भी महज एक संयोग है या फिर कुछ और, क्योंकि गोवा में उनके रिश्तेदार भी रहते हैं और वह पहले वहां रह चुकी है?
>> मेघना के लापता होने के समय जब उसके बेंगलुरु वाले रूम से पुलिस ने बाइबिल व कुछ अन्य पुस्तकें मिलने पर उसके नन बनने के लिए गोवा जाने की थ्योरी पेश की थी, तब डा. सूबेदार ने उसे ठुकरा दिया था। तब उनका कहना था कि उसे पुस्तकें पढ़ने का चाव था, पर उन्होंने यह नहीं कहा था कि वह तंत्र-मंत्र की पुस्तकें भी पढ़ती थी, जो वे अब बता रहे हैं, ऐसा क्यों?
>> डा. सूबेदार दंपत्ति ने मेघना के तलाक होने पर उसके डिप्रेशन में आने और कहीं चले जाने की पुलिस की बात को भी तब स्वीकार नहीं किया था और कहा था कि वह अपनी शादी के वाकये को भुला बैठी है। पुणो में डा. सूबेदार ने कहा कि वह तलाक के बाद से डिप्रेशन में थी और दवाइयां भी ले रही थी।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: