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लालमति को सती होने से रोका क्यों नहीं गया

कसडोल. pious पति की चिता में कूदकर शनिवार को सती हो गई वृद्धा लालमति वर्मा के मामले में पुलिस और प्रशासन के आला अफसर लीपापोती में जुट गए हैं। अब तक की पड़ताल से साफ है कि महिला को परिवार के सदस्यों या गांव के लोगों ने सती होने से रोकने की कोशिश नहीं की।

अब यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि महिला सती होने जा रही है, इसका किसी को पता नहीं था। जबकि परिवार के सदस्य रविवार दोपहर तक स्वीकार कर रहे थे कि महिला पांच-छह दिनों से पति की मौत होने पर सती होने की बात कह रही थी।

एसपी अमित कुमार शनिवार शाम को ग्राम छेछर पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से भी बात की। एसपी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने चिता के पास किसी तरह की पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी है। गांव में धारा 144 लगा दी गई है। इस बीच गांव के जिम्मेदार लोगों ने भी सती होने की घटना से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। गांव के सरपंच सुरेश प्रधान का कहना है कि घटना के समय वह मौके पर नहीं थे। लोगों ने उसे बताया है कि वृद्धा पति के शव के साथ सती हो गई।

कोटवार पूनाराम चौहान का कहना है कि वह भी शनिवार सुबह कसडोल चला गया था। शाम को जब गांव लौटा तो उसे घटना की जानकारी मिली। इन लोगों की देखा-देखी परिवार के सदस्यों ने भी चुप्पी साध ली है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनको पता ही नहीं चला कि लालमति घर से कब निकली।

हफ्ते भर पहले से थी तैयारी
लालमति के बड़े बेटे भुरुऊराम वर्मा ने रविवार को बताया कि पिता की हालत 10 दिन पहले ही काफी बिगड़ गई थी। तब से ही मां लालमति सती हो जाने की बात कर रही थी। परिवार के लोगों ने उसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। शिवनंदन के देहांत के बाद फिर लालमति ने सती होने की जिद पकड़ ली तो परिवार के लोगों ने उसे शनिवार शाम को कमरे में बंद कर दिया था। अंतिम संस्कार के बाद घर के सारे पुरुष नदी से नहाकर लौटे और महिलाओं को नहाने भेजा गया।

नहाकर लौटने के बाद शाम 7 बजे के करीब लालमति सुहागिनों की तरह तैयार होकर पूजा सामग्री हाथ में लेकर झोपड़ी से बाहर निकली। सती होने की रट लगा रही मां के साथ बेटों की हल्की बहस भी हुई। उसके बाद सारे पुरुष गीले कपड़े बदलने चले गए। इसी बीच 75 साल की लालमति नदी की तरफ पैदल निकल गई, जहां पति का अंतिम संस्कार किया गया था। परिवार के अनुसार पुरुषों के वहां पहुंचने तक वह चिता में कूद चुकी थी।

हैरानी की बात यह है कि घर से नदी के बीच बना मरघट करीब दो किमी दूर है। घर के किसी सदस्य या गांव के किसी व्यक्ति ने वृद्धा को रोकने की कोशिश नहीं की। शनिवार रात को वृद्धा के बेटे रामकली ने बताया था कि कुछ लोग लालमति के पीछे गए थे। सारे तथ्यों को मिलाया जाए तो साफ है कि किसी ने भी महिला को बचाने की कोशिश नहीं की।

गौरतलब है कि दो साल पहले भटगांव के पास के ग्राम कुरकुट्टी में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें लक्षमणिया बाई नामक महिला श्रंगार करके पति के शव के साथ सती होने अड़ गई थी। गांव के लोगों और परिवार के सदस्यों ने तुरंत पुलिस को खबर की। पुलिस और जिला प्रशासन के अफसरों ने तत्परता से गांव पहुंचकर महिला और परिवार के सदस्यों को समझाया। महिला की जान बच गई।

सुबह तक चली पूजा
महिला के सती होने की घटना को गांव में महिमा मंडित करने का काम भी शुरू हो गया है। छेछर गांव के आधे से ज्यादा लोग शनिवार रात को चिता की पूजा करने पहुंच गए थे। रात भर वहां रामायण का पाठ हुआ। रविवार को सुबह 5 बजे से आसपास के आधा दर्जन गांवों के लोग नारियल, अगरबत्ती लेकर पहुंचते रहे। पुलिस ने उनको रोकने की कोई कोशिश नहीं की। सुबह 10 बजे के करीब जब पुलिस ने चिता वाले इलाके में प्रतिबंध लगाया तब तक चार सौ से ज्यादा लोग वहां आ चुके थे। चिता के आसपास सुबह नारियल, अगरबत्ती का ढेर लगा था।

पुलिस कहती है, जबर्दस्ती नहीं हुई
महिला के सती होने की खबर मिलते ही आनन-फानन में एक पुलिस पार्टी गांव भेजी गई। रविवार सुबह आला अफसर भी पहुंच गए। एडिशनल एसपी (ग्रामीण) प्रशांत ठाकुर का कहना है कि इस मामले में आपराधिक मामला कायम नहीं किया गया है। किसी ने महिला को सती होने के लिए न उकसाया, न दबाव डाला। ऐसे में मामला अपराध की श्रेणी में नहीं आता। पुलिस की सारी कोशिश यही है कि मौत को महिमा मंडित करने से रोका जाए। लोगों को चिता की पूजा करने से रोक दिया गया है। रविवार की रात एसपी अमित कुमार भी गांव पहुंचे और उन्होंने संबंधित लोगों से चर्चा की। पुलिस का भी कहना है कि यदि घर वाले चाहते तो वृद्धा सती नहीं हो पाती।

एक महिला हुई थी सती
छेछर से करीब दो किमी दूर ग्राम पिकरी में करीब 40 साल पहले खीखबाई (गोदहनिन) पति मालिकराम कुर्मी की मौत के बाद सती हो गई थी। घटना के बाद पिकरी में एक सती मंदिर भी बनाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि खीखबाई छेछर की ही रहने वाली थी।

क्या है मामला
लालमति (75) के पति शिवनंदन वर्मा (85) की शनिवार दोपहर लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। शाम को उनका अंतिम संस्कार किया गया। कुछ देर बाद घर से निकली लालमति चिता में कूद गई।

पहले भी हुई है महिलाएं सती
>> 2002 : अगस्त माह की छह तारीख को पन्ना जिले के सलेहा थाना क्षेत्र के पटना तमोली गांव में कट्टूबाई सती हुई थी। इस मामले में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने पूरे गांव पर जुर्माना लगाया था। मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
>> 2006 : छतरपुर जिले के बारीगढ़ क्षेत्र के ग्राम बनियानी में करईयाबाई सती हुई। छह माह पहले ही इस मामले में करईयाबाई के चार बेटों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
>> 2006 : मई में उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले के रारी बुजुर्ग गांव में 35 वर्षीय महिला विद्यावती सती हुई थी।
>> 2006 : अगस्त में सागर जिले की 40 वर्षीय जनकरानी अपने पति प्रेम नारायण की चिता में कूदकर सती हो गई थी।
>> 1987 : सितंबर में राजस्थान के सीकर स्थित देवराला गांव में 18 वर्षीय रूप कंवर अपने पति माल सिंह की चिता में कूद कर सती हो गई।

क्या है सती एक्ट
सती प्रथा को रोकने के लिए द कमिशन ऑफ सती (प्रिवेंशन) एक्ट 1987 बनाया गया था। यह जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू है। इसमें किसी महिला के सती होने को प्रचारित करना या महिमा मंडित करना अपराध माना गया है।

अपराध की परिभाषा
किसी महिला को सती होने के लिए बहकाने को भी एक्ट में परिभाषित किया गया है।

>> सती होने जा रही किसी महिला का जुलूस निकालना
>> किसी भी स्वरूप में सती होने को न्यायोचित ठहराने की कोशिश
>> सती की स्मृति में कोई ट्रस्ट बनाना, धनराशि एकत्र करना, मंदिर या कोई पक्का स्ट्रक्चर बनाना, पूजा-अर्चना करना।

सजा का प्रावधान
सती के मामलों की सुनवाई राज्य में गठित होने वाली विशेष अदालत में होगी।
>> सती होने की कोशिश करने वाली महिला को एक साल की सजा या जुर्माना या दोनों संभव।
>> यदि कोई महिला सती हो जाती है, तो उसमें परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले व्यक्ति को मृत्यु दंड या आजीवन कारावास के साथ जुर्माना भी संभव।
>> सती होने की कोशिश में सहयोग करने वाले को आजन्म कारावास या जुर्माना।
>> सती होने को महिमामंडित करने की कोशिश के दोषी को कम से कम एक साल की सजा। इसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ कम से कम पांच हजार रुपए का जुर्माना भी शामिल है।

यह भी माना जाएगा अपराध
>> किसी महिला को यह समझाने की कोशिश करना कि सती होने से उसे या परिवार के सदस्य या पति को आध्यात्मिक लाभ होगा।
>> सती होने के फैसले पर अड़े रहने के लिए उकसाना।
>> सती होने जा रही किसी महिला के जुलूस में शामिल होना या उसके फैसले में सहयोग करना।
>> महिला के सती होने के स्थल पर उपस्थित रहकर सक्रिय योगदान देना।
>> जिंदा जलने से बचने की कोशिश कर रही महिला को रोकने की कोशिश।
>> किसी महिला को सती होने से रोक रही पुलिस के काम में बाधा डालने की कोशिश।





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Sandeep Dwivedi
Monday, 13th Oct 2008, 12:15
सतीप्रथा के उन्मूलन में रजा राम मोहन राय ने अहम् भूमिका निभायी.....इस अमानुषिक प्रथा ने महिलाओ पर होने वाले अत्याचार को बढ़ा दिया......शर्म आती है उस समाज के लोगो पर जो आज भी इस कुरीति को बढ़ाने में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं....लीलावती की मौत ने कई सवाल पैदा किए हैं.....सरकार को सख्त कदम उठाना होगा......पुलिस और प्रशासन के निक्काम्मेपण ने लीलावती की जान ले ली.......