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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर/नई दिल्ली. केंद्र सरकार के नक्सल विरोधी विशेष दस्ते कोबरा (कांबैट बटालियन फार रिसाल्यूट एक्शन) की एक यूनिट बस्तर पहुंच गई।
राज्य पुलिस ने कोबरा जवानों की संख्या नहीं बताई लेकिन माना जा रहा है कि दो कंपनियां (200 अफसर-जवान) पहुंची हैं। इस यूनिट ने गंगालूर और कुटरू में छोटे आपरेशन भी किए हैं। आगामी मार्च तक कोबरा की पूरी दो बटालियनें बस्तर में तैनात कर दी जाएंगी।
केंद्र नक्सलियों के खिलाफ सूचना तंत्र को मजबूत बनाने के लिए कोबरा को खुफिया विंग से लेस करने का फैसला किया है। छत्तीसगढ़ में आने वाले दोनों बटालियनों में खुफिया विंग के 30-30 जवान रहेंगे।
इन्हें केंद्रीय संस्थानों में जासूसी की खास ट्रेनिंग दी गई है। डीजीपी विश्व रंजन ने कहा कि यह दस्ते राज्य के इंटेलिजेंस विंग के साथ किस तरह समन्वय स्थापित करेंगे, फिलहाल ये नहीं बताया जा सकता। कोबरा की पूरी तैनाती के बाद इसकी रणनीति बनेगी।
गौरतलब है, कोबरा फोर्स में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के ही जवान होंगे। सीआरपीएफ के एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों से मुकाबले के दौरान उनकी गतिविधियों और रणनीति के बारे में खुफिया जानकारियां बड़ी कारगर होती हैं। लिहाजा हर बटालियन में खुफिया ईकाई का नेतृत्व सहायक कमांडेंट स्तर के अधिकारी करेंगे। ‘कोबरा’ के गठन को सरकार ने इसी साल अगस्त में मंजूरी दी है। इस विशेष बल को 22 राज्यों में फैले नक्सलियों से मुकाबला करना है।
जगदलपुर में ट्रेनिंग स्कूल
कोबरा जवान जंगलवार में प्रशिक्षित होंगे, लेकिन यहां तैनात सीआरपीएफ अफसरों का मानना है कि इन्हें बस्तर के हिसाब से ट्रेनिंग जरूरी है। वहां लड़ाई का मोर्चा कुछ अलग तरह का है। छत्तीसगढ़ एसटीएफ और पुलिस जवानों को कांकेर के गोरिल्ला वारफेयर स्कूल में ट्रेनिंग दी जा रही है।
सीआरपीएफ जवानों को तैनाती के बाद सिर्फ यही बताया जाता है कि उन्हें कहां जाना है और क्या करना है? यही वजह है कि नक्सल इलाकों में मूवमेंट के दौरान सीआरपीएफ को कई बार बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सीआरपीएफ ने जगदलपुर के बार ट्रेनिंग स्कूल के लिए जगह की तलाश शुरू कर दी है। राज्य सरकार इसमें सहयोग दे रही है।