बेंगलूर.बेंगलूर टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में 49 रन पर सचिन तेंडुलकर के आउट होने के बाद अब सबकी निगाहें मोहाली टेस्ट पर टिक गई है। मोहाली टेस्ट 17 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। सचिन को ब्रायन लारा के 11953 रन के रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए अब सिर्फ 15 रन की आवश्यकता है। सचिन के वल्र्ड रिकॉर्ड नहीं बनने से जहां बेंगलूरवासी दुखी हैं वहीं मोहाली के क्रिकेट प्रेमियों ने उम्मीद जताई है कि शायद वे विश्व रिकॉर्ड बनते हुए अपनी आंखों से देख सकेंगे।
वैसे सोमवार को पूरे देश के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें टीवी स्क्रिन पर चिपकी हुई थी। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर एम.चिन्नास्वामी स्टेडियम में बड़ी चपलता के साथ रन बनाए जा रहे थे। सचिन के हर एक रन पर लोग खुशी से झूम रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वे सर्वाधिक टेस्ट रनों के वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे। वे जब रिकॉर्ड से महज १४ रन दूर थे कि नवोदित केमरून व्हाइट की गेंद पर माइकल क्लार्क ने उनका कैच ले लिया। वे आउट अवश्य हुए लेकिन अपनी शानदार बल्लेबाजी से उन्होंने भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच ड्रॉ करवाने में महती भूमिका निभाई।
वैसे सचिन अपनी पारी सहजता से खेल रहे थे। उनके अंदर कहीं कोई दबाव नजर नहीं आ रहा था। रिकॉर्ड से ज्यादा उनका लक्ष्य भारत के लिए मैच बचाना था। उन्हें मालूम था कि थोड़ी सी भी गलती से यदि उनका विकेट गिरता है तो टीम संकट में पड़ सकती है। सचिन को ऐसे ही मास्टर ब्लास्टर नहीं कहा जाता है। वे धीरे- धीरे खेलते हुए भारत को सुरक्षित निकालने लगे क्योंकि वीरेंद्र सहवाग का विकेट शुरू में ही गिरने के बाद भारत के लिए यह मैच जीतने की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थी।
अब इस मैच में दो ही दिलचस्पी रह गई थी। पहली यह कि सचिन विश्व रिकॉर्ड बनाए और दूसरा यह कि भारत मैच ड्रॉ करा ले। सचिन रन बनाते रहे और लोगों की धड़कनें बढ़ती रहीं। मास्टर ब्लास्टर आखिर ४९ रन के योग पर पहुंच चुके थे लेकिन तभी क्लाइमेक्स चेंज हो गया।हर तरफ निराशा छा गई। सचिन आउट हो चुके थे।