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आनंद और क्रैमनिक के बीच होड़ आज से

मुंबई . भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद और रूस के व्लादिमीर क्रैमनिक के बीच बहुप्रतीक्षित विश्व शतरंज चैंपियनशिप की भिड़त मंगलवार 14 अक्टूबर से जर्मनी के शहर बॉन में शुरू हो रही है। पूरा शतरंज जगत यह जानने को उत्सुक है कि बॉन की लड़ाई कौन जीतेगा?

इस टूर्नामेंट के आयोजकों की ओर से कराए गए एक वेब सर्वेक्षण में आनंद को अपने प्रतिद्वंद्वी क्रैमनिक से पर्याप्त बढ़त दिखाई गई है। आनंद और क्रैमनिक के बीच 12 गेम का यह मुकाबला फुटबॉल में ब्राजील-जर्मनी, मुक्केबाजी में मोहम्मद अली-फ्रेजर और टेनिस में फेडरर-नडाल के बीच होने वाले मुकाबले जैसा ही रोचक होने की उम्मीद है।

गैरी कास्पोरोव बनाम एनातोली कारपोव के बीच 1984 में हुए मैच से भी यह मुकाबला बड़ा माना जा रहा है। कास्पोरोव और कारपोव दोनों ही उस रूसी शतंरज स्कूल के खिलाड़ी थे, पर यहां मुकाबला पूर्व बनाम पश्चिम का है।

खेलने की शैली है जुदा :

क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर और ब्रायन लारा जैसे ही इन दोनों शतरंज खिलाड़ियों की खेलने की शैली, दृष्टिकोण और कलात्मकता एक दूसरे से एकदम जुदा है। जिस तरह विचारधारा के मामले में सात्र और वाल्टेयर एक दूसरे से भिन्न हैं, वैसे ही शतरंज के मामले में आनंद और क्रामनिक के विचार अलग हैं। जहां आनंद व्यूह रचने में प्रतिभाशाली हैं और उनको निपुणता से योजना बनाने, गणना करने और आक्रमण की अपनी शैली पर पूरा भरोसा है। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी रूसी खिलाड़ी क्रैमनिक रूढ़िवादी तरीके से ठोस रणनीति बनाकर रक्षात्मक शैली से खेलने के लिए जाने जाते हैं।

आनंद का कौशल देखते ही बनेगा : अगर मैच की शुरुआत क्रैमनिक ने दमदार ढंग से की, तो खेल के मध्य में आनंद का कौशल देखते ही बनेगा। विश्वनाथन आनंद के खेलने की शैली काफी जटिलता है, जबकि क्रैमनिक सरलता से खेलने में विश्वास रखते हैं। खेल के अंत में विजेता को चुनना आसान काम नहीं है।

सफेद मोहरों से दोनों घातक :

सफेद मोहरों से खेलते हुए आनंद और क्रैमनिक दोनों घातक हो जाते हैं, पर इस मुकाबले में जो भी खिलाड़ी काले मोहरों को संभालने में कामयाब होगा, वह लाभ की स्थिति में होगा। इतना तो तय मानिए कि प्रारंभिक और मध्य में इस मुकाबले का निर्णय नहीं होगा।

‘जो अच्छा खेलेगा जीत उसकी होगी’

निश्चित रूप से इस मैच के लिए क्रैमनिक की तैयारियां बेहतर हैं, पर उन्होंने स्वयं यह स्वीकार किया है कि अच्छी तैयारी का मतलब यह नहीं है कि परिणाम भी अच्छा मिलेगा। क्रैमनिक ने कहा, ‘मैच में जो अच्छा खेलेगा जीत उसकी होगी।’

हाई पॉवर टीम को जोड़ा :

दूसरी ओर, आनंद ने भी इस मुकाबले के लिए कम तैयारियां नहीं की हैं। इस मैच में सहायता करने के लिए उन्होंने हाई पॉवर टीम को भी अपने साथ जोड़ा है। इस मैच के लिए अप्रैल से तैयारी शुरू करने वाले आनंद ने कहा, ‘मैंने अपना पूरा वर्ष उनके बारे में ही सोचने में बिताया है।’

बढ़त देने के पक्ष में नहीं :

इस मुकाबले में जीत उसे ही मिलेगी जो अपने स्नायुतंत्र पर बेहतर नियंत्रण रखने के साथ ही कम गलतियां करेगा। दोनों ही खिलाड़ी एक दूसरे को मैच में बढ़त देने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि इस तरह के मुकाबलों में बढ़त बना लेने वाले खिलाड़ी को पकड़ना आसान नहीं होता।





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