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माया-सोनिया आमने-सामने

लखनऊ/नई दिल्ली रायबरेली की जमीन का मामला मायावती बनाम सोनिया गांधी विवाद अब राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली में फैक्ट्री के लिए आवंटित जमीन वापस लेने के उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है, वहीं सोनिया गांधी मंगलवार को रायबरेली जाएंगी। इस बीच मायावती सरकार ने रायबरेली में धारा 144 लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं।

मायावती सरकार ने जहां रायबरेली में भूमिपूजन के लिए जुटाया सामान संबंधित जमीन से हटा दिया है, वहीं बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का रास्ता रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं।

क्या कहा अदालत ने :

जस्टिस प्रदीपकांत और सबीहुल हसनैन ने उत्तरप्रदेश सरकार को इस मामले में एक हफ्ते के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। बेंच ने विवादित जमीन पर भूमिपूजन की अनुमति देने की रेल मंत्रालय की मांग ठुकरा दी है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।

क्या कहा डीएम ने :

रायबरेली के डीएम संतोष श्रीवास्तव ने कहा, त्योहार का मौसम देखते हुए एहतियातन कदम उठाए गए हैं।

यह है मामला :

रायबरेली के लालगंज में स्थित जमीन पर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को भूमिपूजन करना था, लेकिन मायावती सरकार ने किसानों की नाराजगी को कारण बताकर रविवार को जमीन वापस लेने की घोषणा कर दी।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेल मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जमीन का मुआवजा राज्य सरकार को दिया जा चुका था। मगर अब जमीन वापस लिए जाने से रेल कोच फैक्ट्री लगाने की मंत्रालय की योजना को नुकसान पहुंचेगा। केंद्र सरकार के एडीशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक निगम ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट के आदेश के बाद विवादित जमीन पर अब भूमिपूजन नहीं किया जाएगा।

रेल मंत्रालय के अलावा इलाके के ग्रामीणों की तरफ से दिनेशचंद्र मिश्र ने भी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन देने का निर्णय पंचायत में लिया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि फैक्ट्री लगने से उनके बच्चों को रोजगार मिलेगा, लेकिन प्रदेश सरकार के फैसले ने उनकी उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है। कोच फैक्ट्री के लिए दी गई जमीन छह गांवों की ग्राम पंचायतों के अधिकारक्षेत्र में आती है।

जनता में आक्रोश :

रायबरेली की जनता में राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। फैसले के विरोध में सोमवार को रायबरेली के लालगंज इलाके में बंद रखा गया। जगह-जगह मुख्यमंत्री मायावती के पुतले भी फूंके गए।

‘हाईकोर्ट का आदेश मायावती सरकार के तुगलकी फरमान पर न्याय की जीत है। रेल कोच फैक्ट्री परियोजना हर हाल में पूरी होगी। जमीन वापस लेने के मुख्यमंत्री मायावती के निर्णय में प्रतिशोध की भावना झलकती है।’

- दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव





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