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किराए के वकील पर आपत्ति

भोपाल. अदालतों में लंबित मामलों की पैरवी के लिए 40 हजार रुपए महीने पर वकीलों की सेवाएं लेने की लोक शिक्षण संचालनालय की योजना पर विधि विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसको लेकर विधि और स्कूल शिक्षा विभाग में अधिकार क्षेत्र का विवाद छिड़ गया है।

लोक शिक्षण संचालनालय ने लंबित अदालती मामलों के निपटारे में सहायता के लिए संविदा आधार पर वकीलों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। इस बारे में दैनिक भास्कर में 29 सितंबर को ‘किराए के वकीलों से ली जाएगी मदद’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी।

विधि विभाग के सचिव शिवनारायण द्विवेदी ने स्कूल शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में कहा कि कार्य आवंटन नियमों के अनुसार मामलों का प्रतिरक्षण करने के लिए अधिवक्ताओं की नियुक्ति का कार्य विधि विभाग के पास है। पत्र में दो बिंदुओं पर जवाब-तलब किया गया है, मप्र शासन कार्य आवंटन नियम के अनुसार, क्या मामलों का प्रतिरक्षण करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को अपने स्तर पर अधिवक्ताओं की नियुक्ति का अधिकार है और क्या योजना पर विधि विभाग की सहमति ली गई?

पहले भी मांगा था विस्तृत ब्यौरा
योजना के संबंध में संचालनालय ने 27 सितंबर को विधि विभाग को पत्र भेजा था। इसके जवाब में श्री द्विवेदी ने उसी दिन भेजे पत्र में स्कूल शिक्षा विभाग से पूछा, क्या योजना को विधि विभाग के प्रमुख सचिव ने सहमति दी है? उन्होंने योजना के साथ स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव या प्रमुख सचिव के जरिए प्रस्ताव भेजने को कहा। यह पत्र स्कूल शिक्षा विभाग में 3 अक्टूबर को आवक रजिस्टर में दर्ज हुआ है।





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