इंदौर. इंदौर, देवास, खरगोन और धार जैसे बड़े जिलों में गेहूं की पैदावार आने वाले साल में आधी रह जाएगी। बारिश की कमी के कारण तीनों स्थानों पर गेहूं का रकबा पौने तीन लाख हेक्टेयर से घटकर डेढ़ लाख हेक्टेयर तक रहने की उम्मीद है। बड़वानी और बुरहानपुर में रकबा घटने की संभावना नहीं है। गेहूं को लेकर कमोबेश यही स्थिति खंडवा जिले में भी है।
इस बार असामान्य तरीके से बारिश होने के कारण किसानों ने इंदौर जिले में 2.35 लाख हेक्टेयर में तीन चरणों में सोयाबीन की बुआई की थी। कई किसानों ने जुलाई के आखिर में खेतों में बीज डाले मगर फ्लावरिंग स्टेज पर आकर फसलें सूखने लगीं।
भारत कृषक समाज के जिलाध्यक्ष कन्हैयालाल यादव ने राज्यापाल डॉ. बलराम जाखड़ को किसानों द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट भेजी जिसक मुताबिक 94 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन प्रभावित होने की बात कही गई। सोयाबीन फसल खराब होने के बाद किसान गेहूं को लेकर भी चिंतित हैं।
कम बारिश के कारण पहले की रकबा घटकर आधा रह गया है ऐसे में किस्मत ने साथ नहीं दिया तो हालत और खराब हो जाएगी। कृषि उपसंचालक एस.एन. सेन ने बताया गत वर्ष 1.73 लाख हेक्टेयर में रबी की फसल बोई गई थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा। बारिश कम होने से 75-80 हजार हेक्टेयर में ही रबी की फसल ली जा सकेगी।
इसमें गेहूं 30 हजार, चना 25 और आलू 10-12 हजार हेक्टेयर में ही बोअनी की संभावना है। कम बारिश के कारण चने के रकबे में थोड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। श्री सेन ने कहा जहां तक सोयाबीन की फसल प्रभावित होने को लेकर किसान संगठन जो आंकड़े बता रहे हैं वह बहुत ज्यादा है। सांवेर तहसील में थोड़ा नुकसान हुआ है जिसका किसानों को मुआवजा भी दिया जा चुका है।