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तृतीया के दिन दिखेगा चौथ का चांद

जयपुर. कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर किया जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस बार तृतीया को होगा। शुक्रवार 17 अक्टूबर को अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं करवा चौथ का व्रत करेंगी। महिलाएं रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलेंगी। जयपुर में चंद्रोदय रात 7:43 बजे होगा।

पं.बंशीधर जयपुर पंचांग के निर्माता दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस बार तिथियों का कुछ ऐसा योग बन रहा है कि करवा चौथ का व्रत तृतीया को रहेगा। शुक्रवार 17 अक्टूबर को शाम 4:41 बजे से चतुर्थी शुरू होकर 18 अक्टूबर को दोपहर 1:40 बजे तक रहेगी।

इस कारण तृतीया यानी 17 अक्टूबर की रात्रि में दिखने वाला चांद तो चतुर्थी का रहेगा, लेकिन उस दिन तिथि तृतीया होगी। राजस्थान ज्योतिष परिषद के महासचिव डॉ.विनोद शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ पर बारह कला युक्त चंद्रमा के दर्शन होते हैं। इस दिन महिलाएं करवा चौथ के रूप में मां गौरी की पूजा करती हैं। महिलाएं करवा चौथ का व्रत कर मां गौरी से पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। साथ ही चंद्रमा को अघ्र्य देकर व्रत खोलती हैं। इस दिन महिलाएं सुहाग के प्रतीक के रूप में काजल, बिंदी, मेहंदी, चूड़ी और धान से भरा करवा माता को भेंट करती हैं।

चार चतुर्थी व्रतों में सबसे बड़ी चतुर्थी
ज्योतिषियों का कहना है कि वैशाख, भाद्रपद्र, कार्तिक और माघ माह के चतुर्थी व्रतों का विशेष महत्व माना गया है। इनमें कार्तिक में आने वाला यह चतुर्थी व्रत सबसे बड़ा होता है। इसे ही करवा चौथ का व्रत के नाम से जाना जाता है।

क्यों हुआ ऐसा
पंडित दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि चतुर्थी का व्रत उस दिन किया जाता है जब चतुर्थी तिथि में चन्द्रोदय हो। 17 अक्टूबर को उदयात में तृतीया होने के कारण इस दिन तिथि तो तृतीया ही रहेगी, लेकिन शाम को चतुर्थी आ जाएगी। चंद्रोदय चतुर्थी में ही होगा और चांद भी चतुर्थी का ही देखा जाएगा। इस तरह व्रत तो तृतीया का ही होगा, लेकिन चांद चतुर्थी का होगा।





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