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राज्य सरकार से जवाब तलब

जयपुर. राजस्थान हाई कोर्ट ने सुखम गार्डन से बेदखल 6 परिवारों के मामले में दायर एक अन्य जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को मुख्य सचिव, प्रमुख गृह सचिव, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) आयुक्त, नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

न्यायाधीश आर.सी.गांधी एवं मनीष भंडारी की खंडपीठ ने यह आदेश अखिलेश शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया। खंडपीठ ने इन अफसरों से दो सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। इस मामले में खंडपीठ ने खुर्शीद अहमद खान की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार शर्मा के जरिये पूर्व में दायर याचिका पर भी सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.के.शर्मा एवं निमिषा शर्मा ने कहा कि सरकार ने 50 साल से सुखम गार्डन में रह रहे 6 गरीब परिवारों को गलत तरीके से जिला प्रशासन के सहयोग से बिना किसी कारण बेदखल किया है।

बेदखल परिवारों को सुखम गार्डन की जगह उपहार के रूप में 50 साल पहले राजा मानसिंह द्वितीय ने आबंटित की थी, किंतु 22 सितंबर 2008 को इन परिवारों को बिना किसी पूर्व सूचना के बेदखल कर दिया गया। अफसरों ने महिलाओं एवं बच्चों से मारपीट की और इस काम में पुलिस ने भी सहयोग किया। इस तरह का कृत्य क्रूरता है। सरकार ने प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए परिवारों को जमीन से बेदखल किया है। इस जमीन की कीमत 400 करोड़ रुपए है। चूंकि जमीन उपहार में दी गई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना इन परिवारों को बेदखल करने का कोई अधिकार राज्य सरकार को नहीं था।

याचिका में गुहार : हाई कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह राज्य सरकार को निर्देश दे कि बेदखल किए 6 परिवारों को फिर से सुखम गार्डन के मूल मकान में भिजवाया जाए, साथ ही परिवारों को उचित मुआवजा दिलाया जाए। राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करे और उनकी जवाबदेही निश्चित करे। साथ ही उनके इन अफसरों के सेवा लाभों से सम्पूर्ण राशि वसूल की जाए।

पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र लगाए : सुखम गार्डन मामले में पक्षकार बनने के लिए सोमवार को दो प्रार्थना पत्र पेश किए गए। पहला प्रार्थना पत्र मैसर्स सुखम की ओर से डी.सी.मेहता ने पेश किया। इसमें कहा गया कि वे सुखम गार्डन के मालिक हैं। यह जमीन महाराजा सवाई भवानी सिंह ने मैसर्स सुखम को 1986 में लीज पर दी थी और उन्होंने ही मदनसिंह को रहने के लिए इसे दिया था। दूसरा प्रार्थना पत्र सुखम गार्डन के रिसीवर राजेश कर्नल की ओर से पेश किया गया।





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