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आतंकवाद है बड़ा मुद्दा

जयपुर. आतंकियों द्वारा इस साल मई में जयपुर में किए गए बम विस्फोट के खिलाफ पूरे राज्य ने अपने घोषणापत्र में चिंता व्यक्त की है। इसीलिए आतंकवाद प्रदेश की जनता के घोषणापत्र में सात प्रमुख मुद्दों में है।

बेरोजगारी के मुद्दे पर लगभग सभी लोगों की फिक्र बता रही है कि इस विधानसभा चुनाव में यह सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभरेगा। इसके बाद क्रमश: भ्रष्टाचार, शिक्षा, विकास, आरक्षण, महंगाई जैसे मामले प्रमुख मुद्दों के रूप में उभर कर आए हैं। गौरतलब है कि लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सात ऐसे मुद्दे बताने को कहा गया था, जो इन चुनावों में निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। सभी आयु वर्ग के अलावा स्त्री-पुरुष और ग्रामीण-शहरी सभी श्रेणियों में रोजगार उपलब्ध कराने को पहले नंबर का मुद्दा माना गया है। आतंकवाद और सुरक्षा के प्रश्न पर अपना वोट देने का मानस रखने वाले ५२ फीसदी लोगों में सर्वाधिक संख्या युवाओं की है। हालांकि ग्रामीण मतदाताओं में 43.93 प्रतिशत ने ही इसे चुनावी मुद्दा बताया।

41.27 फीसदी लोग बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंतित हैं। हर वर्ग के लोगों का कहना है कि इसने पूरे तंत्र को खोखला कर दिया है। युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं ने शिक्षा के मुद्दे को भ्रष्टाचार पर तरजीह दी है। सर्वे में खास बात रही कि लोगों ने स्वत: स्फूर्त अखबार में प्रकाशित प्रश्नावली को भरकर घोषणा-पत्र बनाने में उत्साह से भागीदारी की।

इसी तरह विकास के मुद्दे पर 38.19 प्रतिशत लोगों का मत है कि इसकी जितनी बातें हुई हैं, उसकी तुलना में काम नहीं हुआ। आधारभूत ढांचे का विकास अभी भी सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए। शहरों से बाहर विकास दिखाई नहीं देता है। बड़े शहरों में सड़कों, बिजली-पानी की स्थिति बेहतर है, लेकिन उनसे सटे ग्रामीण इलाके इनसे महरूम हैं। इसके अलावा शिक्षा, आरक्षण और महंगाई आगामी चुनाव के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे।

शिक्षा को 40.75 प्रतिशत, आरक्षण को 37.07 फीसदी और महंगाई को 36.40 प्रतिशत लोगों ने सबसे प्रभावी मुद्दा बताया। महिलाओं और 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग ने विकास को शिक्षा से अधिक वजनदार मुद्दा बताया। कुल मिलाकर आंचलिक क्षेत्रों में विकास को अन्य मुद्दों पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। आरक्षण और महंगाई प्राथमिकता के सात मुद्दों में से अंतिम दो पायदानों पर रहे।

पार्टी की छवि हो साफ
प्रश्नावली में लोगों से तीन कारण बताने को कहा गया था, जिनके आधार पर वे किसी पार्टी को वोट देना चाहेंगे। इस मुद्दे पर अधिकांश ने माना कि वे किसी पार्टी को वोट देने के मामले में उसकी स्वच्छ छवि को सर्वाधिक अहमियत देंगे। ऐसा मानने वाले 36.15 फीसदी थे। इसके अलावा पार्टी भ्रष्टाचार, महंगाई और आतंकवाद से निपटने में सक्षम होनी चाहिए। तीनों ही मुद्दों पर संयुक्त रूप से 52.64 प्रतिशत लोगों ने सहमति जताई। इसके अलावा 34.09 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि पार्टी का पिछला रिकार्ड और विश्वसनीयता भी मायने रखते हैं।

ईमानदार व शिक्षित हो प्रत्याशी

प्रत्याशी के मामले में पचास फीसदी से ज्यादा लोगों की राय है कि उस पर किसी तरह का दाग नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं होना चाहिए। साथ ही उसे पढ़ा-लिखा होना चाहिए, ताकि वह सदन में उनकी समस्याओं को समझाकर प्रभावी तरीके से उठा सके। 37.83 फीसदी लोग शिक्षा को अनिवार्य तथ्य मान रहे हैं, जबकि 21.73 प्रतिशत ने उसका स्थानीय होना भी जरूरी माना है।





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