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दर्द से नहीं मिलता आराम

ग्वालियर. महिलाएं घंटों रसोई में खड़े-खड़े काम करती हैं। काम करते वक्त महिलाएं बॉडी पॉश्चर पर ध्यान नहीं देतीं। चीजों को झुक कर उठाना, कमर सीधी रखने के बजाय घंटों झुक कर बैठना। सीधे सोने के बजाय उल्टा सोना।

रोजमर्रा के काम करते वक्त गलत बॉडी पॉश्चर से लोगों को जोड़ों के दर्द के साथ ही कई गंभीर बीमारियां भी हो रही हैं। खानपान की अनदेखी के कारण महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, कैल्शियम जैसे जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है। महिलाएं इसका कारण मीनोपॉज को मानती हैं, जबकि ऐसा नहीं है। सच तो यह है कि खानपान की गलत आदतों से वजन बढ़ता है, और बढ़ा वजन उनके बॉडी पॉश्चर को बिगाड़ देता है। चालीस परसेंट बीमारियों का कारण गलत बॉडी पॉश्चर है

गलत बॉडी पॉश्चर के कारण
ग्रामीण लाइफ स्टाइल की बजाय शहरी लाइफ स्टाइल में बॉडी बैलेंस होने का प्रॉब्लम आता है। लोग लम्बे समय तक एक ही पॉश्चर में बैठकर या खड़े होकर काम करते हैं। इससे कमर और गर्दन में दर्द की शिकायतें लेकर डॉक्टर के पास आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। यह कहना है मेडिकल कालेज के आर्थोपेडिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. आरएस बाजौरिया का, वे कहते हैँ आफिस में कम्प्यूटर पर काम करते हुए लोगों में बाडी बैलेंस ज्यादा बिगड़ता है।

कम्प्यूटर सामने रखने के बजाय लैफ्ट और राइट साइड में रखते हैं। गलत तरीके से माउस पकड़ते हैं। इससे कमर, कलाई और गर्दन का दर्द बढ़ता है। कुर्सी पर बैठते वक्त कमर को चेअर का सपरेट देने के बजाय कमर को झुका कर बैठते हैं। एक ही पॉश्चर में 20 मिनट से ज्यादा समय तक बैठने पर स्टिफनेस बढ़ जाती है। व्यस्त रहने, वजन बढ़ने और टीवी देखते हुए सारे काम करने से महिलाओं का बॉडी बैलेंस खराब हो जाता है। देर तक खड़े रहकर काम करना हो तो एक पैर किसी ऊंची चीज पर रखें। इससे पैरों और कमर पर एक्स्ट्रा वजन नहीं पड़ेगा। ऐसा कर आप कमर, पैर और गर्दन के दर्द से बच सकते हैं।

बैलेंस करना होगा
सही पॉश्चर का अर्थ है किसी व्यक्ति के शरीर के जोड़ और मांसपेशियों पर अनावश्यक लोड न पड़े। गलत पॉश्चर में मांसपेशियों पर दबाव बढ़ जाता है। शरीर का वजन ज्यादा हो तो उसका दबाव जॉइंट्स पर पड़ता है। वे समय से पहले ही घिसकर खराब होने लगते हैं, यह कहना है सीनियर ऑर्थोपेडिशन डॉ. प्रशांत लहारिया का। वे कहते हैं महिलाएं सुबह से शाम तक काम तो करती हैं पर नियमित व्यायाम नहीं करतीं। न्यूट्रीशियस फूड और एक्सरसाइज से ही ब्लड का मांसपेशियों में संचार होता है। ज्यादा नीची कुर्सी पर बैठने या ज्यादा झुक कर काम करने से भी बॉडी बैलेंस्ड नहीं रह पाती है। बॉडी का सही पॉश्चर है कि जब भी बैठें 90 डिग्री के पॉश्चर के बजाय आपका शरीर 130 डिग्री के पॉश्चर में हो। इससे शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा।





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