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सती हादसे को रोक सकती हैं महिलाएं

रायपुर. अपने सतित्व का प्रमाण देने के लिए सती होना जरूरी है। वो भी ऐसे युग में, जहां लोग सिर्फ टेक्नोलाजी की बात करते हैं। सतीप्रथा की घटनाएं कभी कभार ही देश के कुछ इलाकों में ही होती रहीं हैं लेकिन दुर्भाग्य से अब इस शर्मनाक विषय पर रायपुर जिला की इस घटना का जिक्र होगा।

कहने को यहां की महिलाएं ऐसे पिछड़ेपन से उभरने के लिए कोशिश कर रही हैं, लेकिन इसमें वे कब तक सफल होंगी, कहा नहीं जा सकता। वुमन भास्कर ने इस घटना पर राजधानी की महिलाओं से चर्चा की। महिलाओं का मानना है कि यदि सख्ती से उस महिला को ऐसा करने से रोका जाता, तो शायद ऐसी घटना नहीं घटती। इस तरह की घटनाएं महिलाओं का मनोबल कमजोर करती हैं।

माहौल पर निर्भर
बिजनेस वुमन रीमा टिंबरेवाल ने कहा कि पति के देहांत के बाद पत्नी का भावुक होना तय है, लेकिन इस आवेश में आकर सती बन जाना ठीक नहीं है। सती बन जाना उस वक्त के माहौल पर निर्भर करता है। हो सकता है उस समय ऐसी परिस्थिति निर्मित हो गई हो। किसी न किसी तरीके से उसे प्रेरित किया गया हो, ताकि वह पति की चिता में कूदकर सती बन जाएं। उस महिला को ये भी देखना था कि वो एक पत्नी के अलावा बेटी, मां और बहू भी है। समता कालोनी की किरण अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं के लिए समाज ने कई तरह के रीति-रिवाज बना दिए गए हैं, जिसे मानना जरूरी है। इसके कारण ही महिला ने सती होने का निर्णय लिया हो, या फिर उसे बाध्य किया गया हो। हो सकता है किसी सामाजिक बाध्यता के कारण महिला ने सती होने का निर्णय लिया हो।

महिलाओं को रोकना होगा
हाउस वाइफ शिखा चौधरी ने कहा कि सतीप्रथा पर बहुत सारे कानून बन चुके हैं, लेकिन ऐसे मामलों में यदि महिलाएं आगे आएं, तो ऐसी प्रथा रूक सकती है। मामला चाहे जो भी हो, कहीं न कहीं ऐसी घटना के लिए समाज ही जिम्मेदार होता है। बिजनेस वुमन हर्षा राव का मानना है कि समाज में बेसहारा नारियों के लिए बहुत से सुरक्षित स्थान उपलब्ध हैं। यदि उसे किसी तरह की परेशानी थी, तो बहुत सारी ऐसी ही संस्थाएं उसकी मदद को आगे आतीं। वैसे महिला की जो उम्र है, उससे तो यही लगता है कि सती बनने के लिए कोई मजबूरी होगी।

क्या है घटना
कसडोल से 14 किलोमीटर दूर ग्राम छेछर में 75 वर्षीय महिला लालमति वर्मा शनिवार को सती हो गई। वह महिला अपने पति शिवनंदन वर्मा की जलती चिता पर कूद गई। घटना के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सबने नारियल लेकर चिता की परिक्रमा की। इतना ही नहीं, वहां रातभर रामायण पाठ की तैयारी भी की गई। भले ही यह रायपुर जिले का पहला मामला हो, लेकिन ऐसी एक और घटना छेछर से दो किलोमीटर ग्राम पिकरी में चालीस साल पहले की बताई जाती है। वहां उस वक्त महिला के सती होने के बाद सती मंदिर भीबनाया गया।

शिविर लगाएगा महिला आयोग
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विभा राव का मानना है कि कठोर कानून बनने के बाद भी ऐसी घटना का होना अशिक्षा को दर्शाता है। इस घटना की छानबीन तो हो रही है। महिला को सती बनने के लिए प्रेरित करने वालों को कठोर सजा दी जानी चाहिए। हो सकता है वह महिला डिप्रेशन के कारण सती हो गई हो, लेकिन वहां सती मंदिर का होना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि लोगों में जागरुकता की कमी के कारण ऐसी घटना घटी हो। महिला आयोग महिलाओं को जागरुक करने के लिए बेटियां कार्यक्रम भी आयोजित कर चुकी है। ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए महिला आयोग अपने स्तर पर जागरुकता अभियान चलाएगा। घटनास्थल की छानबीन के बाद आयोग ग्राम छेछर में शिविर लगाकर लोगों को जागरुक करेगा।





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