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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. सरकार ने दो जिलों की 9 तहसीलों को सूखाग्रस्त मानते हुए इलाके के किसानों को आज बड़ी राहत देने का फैसला किया। प्रभावित तहसीलों के किसानों से कर्ज वसूली पर रोक रहेगी। उन्हें रबी के लिए पानी भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह की अध्यक्षता में दोपहर हुई कैबिनेट की बैठक में किसानों की समस्याओं पर मंथन हुआ। राजनांदगांव, कवर्धा, रायपुर, कांकेर और बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों में सूखे का प्रभाव है।
इनमें से राजनांदगांव और कवर्धा जिले की 9 तहसीलों की फसल चौपट हो चुकी है। बाकी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई हैं। फिलहाल इन्हीं दो जिलों के छुईखदान, खैरागढ़, राजनांदगांव, अंबागढ़ चौकी, मोहला, मानपुर, पंडरिया, बोड़ला और सहसपुरलोहरा के किसानों से कर्ज वसूली नहीं की जाएगी। यहां के किसान यदि रबी फसल के लिए कर्ज मांगते हैँ तो उन्हें दिया जाएगा। इसके अलावा राजनांदगांव, कवर्धा, कांकेर और रायपुर-बिलासपुर के कई इलाकों में विशेष राहत कार्य शुरू करने का फैसला किया गया है।
कलेक्टरों से इन जिलों की तत्काल नजरी आनावरी रिपोर्ट मांगी गई है। 37 पैसे से कम फसल वाले क्षेत्रों में तुरंत राहत कार्य खोले जाएंगे। अन्य जिलों से भी कलेक्टरों से नजरी आनावरी रिपोर्ट भेजने को कहा जाएगा। 37 से 50 पैसै तक फसल वाले इलाकों में दीवाली के बाद राहत कार्य शुरू किए जाएंगे। प्रदेश के बांधों में पर्याप्त पानी है। मांग के मुताबिक सभी क्षेत्रों में पानी दिया जाएगा।
धान खरीदी 20 से : कैबिनेट के बाद पत्रकारों को खाद्यमंत्री सत्यानंद राठिया ने बताया कि इस बार प्रदेश में 35 लाख मी.टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 40 लाख मी. टन धान खरादने का लक्ष्य था। 20 अक्टूबर से खरीदी शुरू हो जाएगी।
इसके लिए 1577 केंद्र बनाए गए हैं। श्री राठिया ने बताया कि धान खरीदी के लिए सरकार ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया से 4013 करोड़ रुपए का ऋण मांगा है। यह मंजूर कर लिया गया है। इसमें 107 करोड़ रुपए की पहली किश्त मिल गई है। 10 अक्टूबर से धान खरीदी का ट्रायल शुरू हो गया है, ताकि किसानों को दीपावली पर रुपयों की कमी न हो, लेकिन मुख्य खरीदी 20 अप्रैल से होगी। सरकार 10 हजार मी. टन मक्का भी खरीदेगी। इस बार मक्के की दर प्रति क्ंिवटल 620 रुपए से बढ़ाकर 820 रुपए कर दी गई है।
तीन मंत्री नहीं आए - राजस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एकता परिषद की बैठक में दिल्ली में होने की वजह से बैठक में नहीं आ सके। गृहमंत्री रामविचार नेताम सड़क मार्ग से सरगुजा से आते समय विलंब से पहुंचे इसलिए बैठक में नहीं आए। स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल भी बैठक में नहीं आ पाए।
मंडी शुल्क में 1 फीसदी कमी
सरकार ने राज्य के किसानों को राहत देते हुए कृषि उत्पादकों पर लगने वाले 2 प्रतिशत मंडी शुल्क में कमी करने का फैसला किया है। अभी धान व अन्य उत्पादकों पर 2 फीसदी मंडी शुल्क लिया जाता है। अब धान को छोड़कर सभी उत्पादकों पर केवल 1 प्रतिशत शुल्क लगेगा। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक मंडी अधिनियम 1972 के तहत किसानों यह छूट दी गई है।
बीज उत्पादकों को ज्यादा अनुदान
सरकार ने धान बीज उत्पादन करने वाले किसानों को अनुदान भी बढ़ाकर देने का फैसला किया है। किसानों को 200 रुपए प्रति क्ंिवटल की बजाए 300 रुपए प्रति क्ंिवटल अनुदान मिलेगा। इससे किसानों को बीज पैदा करने में प्रति हेक्टेयर करीब 3 हजार रुपए का फायदा होगा। धान का समर्थन मूल्य बढ़ने तथा उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है।
जमीन पर चर्चा नहीं
कैबिनेट की बैठक में जमीन आबंटन के मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। बताया गया कि विभिन्न संस्थाओं और एनजीओ द्वारा सरकार से जमीन मांगी गई है। इन पर बैठक में चर्चा होने और संस्थाओं को जमीन एलाट किए जाने की संभावना थी। कांग्रेस ने भाजपा से जुड़े दो डाक्टरों को जमीन आवंटित करने का आरोप लगाते हुए कैबिनेट में इसे रखे जाने की संभावना व्यक्त की थी।