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शिक्षा, रोजगार हैं शीर्ष मुद्दे

रायपुर. छत्तीसगढ़ की जनता अब शिक्षा के लिए लालायित है। इसीलिए रोजगार के बाद यह (शिक्षा) उसकी दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भास्कर समूह की पहल पर तैयार अपने घोषणापत्र में प्रदेश की जनता ने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, महंगाई, नक्सल समस्या और ग्रामीण विकास को भी आगामी विधानसभा के सात सबसे प्रमुख मुद्दों में बताया है।

जनता के घोषणापत्र में बेरोजगारी 50 फीसदी वोटों के साथ सबसे बड़ा मुद्दा है, 48 फीसदी वोटों के साथ शिक्षा दूसरे नंबर पर है। भ्रष्टाचार को 44 फीसदी लोगों ने, कानून-व्यवस्था को 36 फीसदी, महंगाई को 34 फीसदी, नक्सल समस्या को 33 फीसदी और ग्रामीण विकास को भी 33 फीसदी लोगों ने प्रमुख मुद्दा माना है। भास्कर ने लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव के सात प्रमुख मुद्दे बताने को कहा था। 17 हजार 305 लोग इस अभियान में जनता का घोषणापत्र तय करने के लिए आगे आए।

पार्टी के मामले में राज्य की जनता ने स्वच्छ छवि को सबसे ज्यादा महत्व दिया है। विकासोन्मुखी व जनहित में कार्य करने वाली पार्टी व प्रत्याशी को दूसरा व तीसरा स्थान दिया है। उम्मीदवार की विशेषताओं पर जनता ने पहले क्रम पर स्वच्छ एवं ईमानदार छवि वाले प्रत्याशी को तवज्जो दी है, जबकि दूसरे एवं तीसरे क्रम पर क्रमश: जनहितैषी और जागरूक छवि वाले प्रत्याशी को पसंद किया है।

सात प्रमुख मुद्दों के अलावा जनता ने तीस से ज्यादा अन्य मुद्दे भी उठाए हैं जिनमें खेती एवं पर्यावरण, गरीबी, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क एवं आरक्षण शामिल हैं।

ये थे तीन सवाल
भास्कर ने अपने पाठकों से जो तीन सवाल पूछे, उनमें पहला यह था कि वे सात मुद्दे क्या होंगे जिनके आधार पर आप अपना वोट देना चाहेंगे। दूसरा- किसी भी पार्टी के वे तीन आधार क्या होंगे, जिन्हें ध्यान में रखकर वोट डालेंगे और तीसरा- किसी भी उम्मीदवार में वे कौन-सी तीन विशेषताएं होनी चाहिए, जिन्हें ध्यान में रखकर वोट देंगे।

ऐसे किया सर्वे
दैनिक भास्कर ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने पाठकों के बीच सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनाई। देशभर में इस तरह की अनूठी पहल के लिए सर्वप्रथम एक प्रश्नावली का अखाबार में प्रकाशन किया गया। पाठकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए दैनिक भास्कर ने स्वयं डाक खर्च वहन किया। इसके अलावा इसी प्रश्नावली को परचे (पंफलेट) के रूप में छापकर टीम के सदस्यों से सभी छोटे-बड़े शहरों के विभिन्न आयु-वर्गो, पेशों के लोगों से भरवाकर मंगवाया।

इस प्रश्नावली की खासियत यह रही कि भास्कर पत्र समूह ने पाठकों को अपनी तरफ से कोई ऑप्शन टिक करने के लिए बाध्य नहीं किया, बल्कि उन्हें स्वविवेक से मुद्दे लिखने के लिए विस्तृत जगह दी। इस फार्म में तीन सवाल पूछे गए थे, जिनका जवाब पाठकों को स्वविवेक से भरना था। विशेषज्ञों की टीम ने हजारों की संख्या में आए फीडबैक फार्म को बीस दिनों तक दिन रात एक करके इस सर्वे को अंजाम दिया।

पार्टी स्वच्छ छवि वाली चाहिए
पाठकों से प्रश्नावली में पूछा गया था कि किस आधार पर पार्टी को वोट देंगे, तो 47.03 फीसदी लोगों का जवाब था कि वे स्वच्छ छवि वाली पार्टी को ही वोट देंगे। किसी पार्टी के पिछले रिकार्ड देखने वाले मात्र 5.80 फीसदी पाठक ही निकले। महंगाई नियंत्रित करने वाली पार्टी के समर्थन में मात्र 5.06 फीसदी पाठक ही सामने आए। इससे यह तथ्य उभरकर सामने आया कि छत्तीसगढ़ के पाठकांे के लिए विकासोन्मुखी और देश व जनहित में काम करने वाली पार्टी ज्यादा मायने रखती है।

जनहितैषी और ईमानदार हो
सर्वेक्षण में पाठकों ने प्रत्याशी के स्वच्छ छवि का, जनहितैषी और जागरूक होने को वरीयता दी है। पहले नंबर पर 64.26 फीसदी पाठकों का मानना है कि प्रत्याशी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि का होना चाहिए। सर्वे में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह आया कि जहां एक ओर मुद्दे की बात पर रोजगार और शिक्षा सबसे अव्वल है, वहीं पढ़े-लिखे प्रत्याशी को 31.40 फीसदी पाठकों ने अपनी पसंद बताकर चौथे स्थान पर रखा है।





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