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लालमति के परिवार के सात सदस्य गिरफ्तार

कसडोल. सती होने वाली ग्राम छेछर की लालमति वर्मा के परिवार के सात सदस्यों को पुलिस ने सोमवार शाम गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। परिवार पर महिला को सती होने से नहीं रोकने का आरोप है।

इलाके में महिलाओं के सती होने के पुराने इतिहास से डरा प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई घटना न हो। रविवार रात ढाई बजे तक पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों से अलग-अलग बयान लिए। नदी के संगम स्थल पर महिला की चिता वाले स्थान को पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। पुलिस के दबाव के चलते पूजा सामग्री लेकर आसपास के गांवों से लोगों के आने का सिलसिला थम चुका है।

कसडोल से 17 किमी दूर इस गांव में अजीब सा सन्नाटा है। जहां देखो वहां पर सिर्फ पुलिस के जवान ही दिख रहे हैं। नदी के जिस हिस्से में महिला का अंतिम संस्कार किया गया है, वहां कफ्यरू जैसी स्थिति है। इस हिस्से को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया है। आसपास के गांवों में कल से मुनादी करवाई जा रही है, जिसमें लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि यदि उन्होंने सती पूजा के लिए छेछर गांव में प्रवेश किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रविवार तक इस गांव में सती की पूजा करने के लिए लोग ट्रैक्टर से लेकर अपने साधनों से गांव में आ रहे थे। पुलिस की चेतावनी के चलते लोगों ने इस गांव से दूर रहना ही बेहतर समझा। रायपुर रेंज के आईजी वाईकेएस ठाकुर ने भी सोमवार को गांव पहुंचकर अब तक की जांच की जानकारी ली और संबंधित लोगों से चर्चा की।

पिछले दो दिनों से पुलिस परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों से लेकर सरपंच, कोटवार तक के बयान ले रही है। सौ से ज्यादा लोगों के बयानों के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई थी कि परिवार के लोगंों ने महिला को सती होने से नहीं रोका। कमीशन ऑफ सती प्रिवेंशन एक्ट 1987 में यह गंभीर अपराध है। इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर मृत्यु दंड या आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। सारे दस्तावेजी सबूत जुटाने के बाद रविवार रात को पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों को घर से बाहर गांव के स्कूल में बुलाकर बयान लिया। यह काम रात को 2.30 बजे तक चला।

एसडीओपी केएस परिहार ने बताया कि पुलिस दाह संस्कार के बाद परिवार के सदस्यों का इंतजार कर रही थी। पुलिस को भी महिला लालमति की अस्थियां जांच के लिए चाहिए थीं। सोमवार सुबह यह काम होते ही शाम को महिला की बड़ी बेटी घुरवा बाई (५३), तीनों बेटों भुरऊ, भारत वर्मा (45), कलीराम (50 ) और बहुओं उत्तरा बाई (45), मथुराबाई (35) और राही बाई (38) को गिरफ्तार कर लिया गया। परिवार के सदस्यंों का कहना है कि कलीराम की पत्नी मथुराबाई घटना के दिन गांव में थी ही नहीं। वह अगले दिन रविवार को छेछर पहुंची। एसडीओपी का कहना है कि मथुरा के बारे में सामने आए तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि परिवार के बच्चों को आरोपियों की सूची से हटा दिया गया है। कोटवार, सरपंच से लेकर कई लोगों के बयान में यह बात आ चुकी है कि महिला पिछले तीन-चार दिनों से पति की मौत होने पर सती हो जाने की बात कर रही थी। शनिवार दोपहर शिवनंदन वर्मा की मौत के बाद तो वह पूरी तरह से अड़ी हुई थी। परिवार के सदस्यों ने महिला को रोकने के लिए परिवार के बाकी सदस्यों, गांव के लोगों या पुलिस की मदद नहीं ली। पुलिस को भी सूचना ऐसे समय देने की कोशिश की गई, जब महिला सती होने के लिए घर से निकल गई। एसडीओपी का कहना है कि महिला के चिता में कूदते वक्त भी वहां गांव के कई लोग उपस्थित थे। इन लोगों की पहचान करने के बाद उनके खिलाफ भी जुर्म कायम किया जाएगा।

मामले की गंभीरता का अंदाज नहीं था
पुलिस अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि परिवार के सदस्यों को भी अंदाज नहीं था कि किसी महिला के सती हो जाने के बाद इतने बड़े कानूनी झमेले में वे फंसने जा रहे हैं। वे बचपन से ही ऐसे माहौल में बड़े हुए हैं, जहां सती को देवी की तरह माना जाता है। छेछर से करीब दो किमी दूर ही पिकरी गांव में 45 साल पहले सती हुई एक महिला का मंदिर है। इस मंदिर की पूरे इलाके में काफी मान्यता है। सात-आठ किमी दूर ग्राम सिलाडीह और धिवरा में भी दो महिलाएं सती हो चुकी हैं। सिलाडीह में अंगार बाई नामक महिला का मंदिर भी है। यही वजह है कि पुलिस सती होने की ताजा घटना से तनाव में है। आला अफसर मानते हैं कि यदि दबाव नहीं बनाया गया तो इस सिलसिले को रोकना कठिन हो जाएगा।

सख्ती न होती तो मेला लग जाता
महिला के सती हो जाने की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से लोगों का रेला शनिवार रात से ही छेछर पहुंचाना शुरू हो गया था। सती की चिता की पूजा करने के लिए शनिवार रात को पूरा गांव लगभग खाली हो गया था। बच्चों से लेकर महिलाएं, बुजुर्ग सारे लोग महानदी, शिवनाथ और लीलागर नदी के संगम स्थल पर पहुंच गए थे। गांव के लोगों का कहना है कि यदि पुलिस नहीं आती तो कई दिनों तक हजारों की संख्या में लोग वहां जुटे रहते।

छेछर में भी सती का मंदिर बनाने की अटकलें शुरू हो गई थीं, जिसे पुलिस के डंडे के डर से काबू किया गया। कुछ ऐसा ही नजारा ग्राम पिकरी में 45 साल पहले था, जब खीखबाई (गोदनहीन) सती हुई थी। पिकरी गांव के 62 साल के गुरबार सिंह के सामने उस समय का दृश्य आज भी जीवंत हो उठता है। गुरबार ने बताया कि लगातार डाले जा रहे नारियलों के कारण आठ दिन तक खीखबाई की चिता धधक रही थी। आसपास के इलाके से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे।

गृहमंत्री ने दिए जांच के आदेश
रायपुर. गृहमंत्री रामविचार नेताम ने सतीकांड की जांच के लिए कलेक्टर सोनमणि वोरा को आदेश दिए हैं। श्री वोरा ने जांच का जिम्मा बलौदाबाजार के एडिशनल कलेक्टर एसके शर्मा को दिया है। उनसे दस बिंदुओं में जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने कहा गया है। गृहमंत्री श्री नेताम ने दैनिक भास्कर से कहा कि प्रारंभिक तौर पर प्रशासन की लापरवाही सामने नहीं आई है। जो दोषी हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी।

पुलिस के डर से मुंह बंद
भास्कर संवाददाता ने इस पूरी घटना के बारे में गांव के लोगों से बात की। पुलिस कार्रवाई के डर से ज्यादातर लोगों ने अपना मुंह बंद कर रखा है। शनिवार को हुई घटना के बारे में तो कोई कुछ नहीं बोलना चाहता। यहां तक कि परिवार के सदस्य भी दो दिन पहले तक के अपने बयान से पलट गए हैं। लालमति की चिता की पूजा करने वाले लोग अपना नाम छिपाने में जुटे हुए हैं ताकि पुलिस के पचड़े से बचा जा सके। पर वे सती को देवी की तरह मानने के अपने विश्वास पर भी अड़े हुए हैं।





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