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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur जांजगीर. कीट प्रकोप ने जिले में पिछले पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। फसल में ब्लाईट, ब्लास्ट, तनाछेदक,बंकी, माहो, भूरा माहो, चितरी, बीएलबी,गंगाई जैसे विभिन्न प्रकार के रोग से बचने का उपाय किसानों ने किया मगर दवा का असर कीट पर बेअसर साबित हो रहा है।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जिले में १ लाख ६क् हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में खरीफ फसल लगाई गई है। जिसमंे १ लाख ४३ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल लगाई गई है। वहीं बाकी क्षेत्र में दलहन, तिलहन की बोनी की गई है। प्रारंभिक दौर से ही कीट प्रकोप का साया फसल पर पड़ा जो अब तक पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस साल जितना आज तक कीट प्रकोप नहीं हुआ थी। पिछले पांच वर्ष के आकड़ों के मुताबिक इस वर्ष रिकार्ड तोड़ कृषि क्षेत्र में कीट प्रकोप फैला है। जिले में १ लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कीट प्रकोप ने फसल को अपनी चपेट में ले लिया है।
कहां कहां की फसल प्रभावित
जिले में कीट प्रकोप ने सभी जगह किसानों को परेशान किया है। नरियरा से लेकर मालखरौदा जैजैपुर तक किसानों को कीट प्रकोप का सामना करना पड़ा है। मुलमुला के किसान भगवान सिंह और प्रकाश साहू ने बताया कि कीट प्रकोप के चलते इस साल फसल की कटाई करने खेत जाना संभव नहीं लग रहा है। उन्होंने कहा कि फसल में कीट प्रकोप से बचने सारे जतन किए पर वह बेकाम साबित हो रहे हैं।
कोनार के किसान गुड्डू सिंह और नवीन सिंह ने बताया कि पहले फसल में तना छेदक व गंगाई की शिकायत थी अब भूरा माहो और झुलसा ने नाक में दम कर रखा है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए दवा का छिड़काव तो किया पर दवा काम नहीं कर रहा है। बम्हनीडीह क्षेत्र के गांव मुड़पार के किसान रामशरण राठौर ने बताया कि अन्य साल की तुलना में इस साल कीट प्रकोप ज्यादा है। दवा का छिड़काव करने के बाद इस पर नियंत्रण पा लिया जाता था, पर इस वर्ष दवा काम नहीं कर रहा। खरौद निवासी गोपाल केडिया ने बताया कि क्षेत्र में भूरा माहो ने किसानों की हालत खराब कर दी है। उपचार के लिए किसान दवा छिड़काव कर रहे हैं ,पर वह भी काम नहीं कर रहा है।
कृषि विभाग के कर्मचारी भी परेशान
कीट प्रकोप से बचने के लिए विभाग के क र्मचारी भी किसानों को नसीहत देते हुए थक गए पर समस्या पर विराम नहीं लग पा रहा है। नियंत्रण के उपाए के लिए जगह जगह पांप्लेट भी बटवाए जा रहे हैं पर सारे प्रयास धरे के धरे रह जा रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को खेतों में संतुलित मात्रा में खाद का छिड़काव करना चाहिए, मेंढ़ पर खरपतवार नहीं होनी चाहिए, प्रभावित क्षेत्र में खेत का पानी सूखा कर देना चाहिए और यूरिया का छिड़काव कम करना चाहिए।
नकली कीटनाशक मिलने की शिकायत
कीट प्रकोप से बचाव के लिए बाजार में दवा शुरू से ही उपलब्ध है। बाजार में किस क्वालिटी की दवा बिक रही है, इससे किसान अनजान हैं। वे बाजार से दवा खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं,पर दवा का असर कीट प्रकोप पर नहीं होने से वे भी परेशान हैं। किसानों की शिकायत मिलने पर कृषि विभाग ने दवा का सेंपल जांच के लिए हैदराबाद लैब भेजा है, पर रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। बताया जाता है कि कृषि विभाग किसानों को खेतों में १ एकड़ में २क् टंकी दवा का छिड़काव करने की बात करती है, पर किसान निर्धारित मात्रा में दवा का छिड़काव नहीं करते। जिसके चलते दवा का असर कम करता है।
क्या है कीट प्रकोप के कारण
कीट प्रकोप का प्रमुख कारण अधिक यूरिया के छिड़काव करना है। विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि खेतों में फसल रोपित करने के बाद सीमित पानी रखना चाहिए, खेतों में अधिक पानी रहने से कीट प्रकोप की संभावना बढ़ती है।बीजों को बीजोपचार नहीं करने से कीट प्रकोप होता होता है। खेतों के मेढ़ में खरपतवार हर साल नष्ट नहीं करने से कीट प्रकोप बढ़ता है।
किसानों को फसल में कीट प्रकोप की शिकायत होने के बाद कृषि विभाग से संपर्क कर दवा छिड़काव करने कहा जाता है पर वे अपने मन मुताबिक दवा का छिछ़काव करते हैं, जिससे दवा काम नहीं करती। किसान दवा की मात्रा भी कम कर छिड़काव करते हैं। किसानों को 1 एकड़ खेत में 20 टंकी दवा का छिड़काव करना चाहिए।
-एमआर भगत, उप संचालक कृषि