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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur कोरबा. सूभेदार नर्सिग होम के संचालक डा. मोहन सूभेदार व उनका परिवार आज राहत महसूस कर रहा था।
रविवार की रात डा. सूभेदार अपनी पुत्री मेघना को पुणो से लेकर यहां पहुंचे। तब से कभी मीडिया, तो कभी उनके परिचितों की उनके घर पर आमदरफ्त थी। डा. सूभेदार ने बताया कि मेघना घर में बेहतर महसूस कर रही है। उसे लापता होने के छह माह के दिनों को छोड़कर बाकी बातें बखूबी याद हैं।
उसने स्विट्जरलैंड में रहने वाली अपनी बहन नंदिता से फोन पर बात की। दोनों बहनों के बीच नेट चेटिंग भी हुई है। अभी उसकी हालत में सुधार नजर आ रहा है, फिर भी हम उसे लापता होने के दरम्यिन की बातों को कुरेद नहीं रहे हैं। यह उसकी मानसिक स्थिति के लिए ठीक लग रहा है। छह माह से गायब हमारी खुशियां अब लौट आई हैं। उसकी हालत देख यह तो साफ लगता है कि उसने ये दिन काफी तकलीफ व कठिनाई में गुजारे हैं।
तांत्रिक की बातें सही सिद्ध हुई
डा. सूभेदार ने बताया वैसे तो वे मेघना के लापता होने से पूर्व तंत्र-मंत्र या सिद्धि में यकीन नहीं करते थे, पर इस दौरान कुछ ऐसी बातें हुई कि ऐसी बातों में कुछ न कुछ तथ्य होना नजर आ रहा है। मेघना का फोन कॉल जिस दिन उन्हें आया, उससे ठीक तीन दिन पहले उनके एक पेशेंट ने उनसे कहा कि जबलपुर के एक तांत्रिक लापता लोगों का पता बता देते हैं। उन्होंने उसे मेरे पास भेजा। उस तांत्रिक ने घर आकर कुछ जानकारी ली और ध्यान कर मंत्र पढ़े।
उसके बाद कहा कि ठीक तीन दिन बाद तुम्हें मेघना की खबर मिलेगी-वह जिंदा है। इसके बाद वह चला गया। शुरू में तो मुझे यही लगा कि इससे पहले जैसे और ज्योतिष या पंडित कहते आए हैं, वैसी ही यह बात भी होगी, पर जब तांत्रिक के बताए अनुसार ठीक तीसरे दिन मेघना का फोन आया, तब यकीन करने के सिवाय चारा क्या था। हालांकि डा. सूभेदार उस पेशेंट या तांत्रिक का नाम-पता बताने को टाल गए।
उन्होंने यह भी कहा कि मेघना से जुड़ी किसी बात को भला वे क्यों छुपाएंगे? मेघना को पुस्तकें पढ़ने का चाव था। पर वह तंत्र-मंत्र की पुस्तकें भी पढ़ती है यह हमें तब पता चला जब उसके लापता होने के दौरान मुंबई पुलिस यहां जांच-पड़ताल के लिए आई और उसके लगेज से हमें ये पुस्तकें मिली। मेघना के तलाक के संबंध में पूछे जाने पर डा. सूभेदार का कहना था कि शायद हमने गलत पात्र का चयन कर लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि तलाक के बाद से हमारा उस परिवार से न तो संबंध है और न ही उनका कोई टेलीफोन नंबर ही उनके पास है।
केसियो से दिल लगाया मेघना ने
आज जब मेघना के यहां यह प्रतिनिधि पहुंचा, तब वह अपना केसियो बजा रही थी। अपने माता-पिता के बीच वह प्रसन्न लग रही थी। डा. सूभेदार के अनुसार मेघना का वजन पहले ६क् किलो से अधिक था, अब वह केवल ४क् किलो की रह गई है जो बताता है कि वह किन यातनाओं के दौर से गुजरी है।
मेघना घर में अपरिचित लोगों को देखकर एकबारगी तो केसियो बजाना छोड़ उनकी ओर देखने लगी। फिर ऐसा भी लगा मानो वह कुछ बताना चाह रही हो। उसने बातचीत में कहा कि उसे घर लौटकर अच्छा लग रहा है, क्योंकि उसने यह सोचा ही नहीं था कि वह कभी घर भी लौटेगी।
पुलिस ने फिर खड़े किए हाथ
मेघना के ११ अप्रैल को मुंबई से लापता होने व 10 अक्टूबर को पुणो में रहस्यमयी ढंग से प्रगट होने के बीच मुंबई हो या गोवा पुलिस, दोनों की भूमिका सवालिया घेरे में नजर आ रही है। सीएसटी रेल पुलिस में डा. सूभेदार ने मेघना के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीएसटी रेल पुलिस की तलाश रूटीन कार्रवाई तक ही रही।
डा. सूभेदार के निकट संबंधी एटीएस में वरिष्ठ अधिकारी हैं। उनकी पहल पर मेघना की खोजबीन की गई। जिसमें उसके १३ अप्रैल को बांद्रा-कुर्ला काम्पलेक्स व १५ अप्रैल को गोवा के एटीएम से मेघना का कार्ड ऑपरेट होने की बात पता चली। उसके लापता होने के बाद से ही बंद पड़े मोबाइल की गोवा में पतासाजी भी एटीएस के कारण ही हुई। गोवा में मेघना की मौजूदगी के बाद भी गोवा पुलिस पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुई। जिनके पास से मोबाइल मिला था, उन्हें भी पूछताछ के बाद तुरंत छोड़ दिया गया। यदि पुलिस इन मौकों पर गंभीर हुई होती तो शायद मेघना का पता व उसके गायब होने का रहस्य पहले ही सामने आ जाता।
अब सीएसटी रेल पुलिस के एसीपी बापू थोम्बरे का कहना है कि उनके पास मिसिंग की रिपोर्ट थी और मेघना मिल गई। केस पूरा हुआ, अब यदि डा. सूभेदार कोई नई रिपोर्ट दर्ज कराते हैं तो हम आगे जांच करेंगे। उन्होंने अभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
एसीपी के इस कथन के बाद साफ है कि पुलिस ने इस सारे मामले से एक बार फिर हाथ खड़े कर लिए हैं। रही बात गोवा में २५ जून को मिले अज्ञात युवती के क्षत-विक्षत शव की तो इस संबंध में वहां के एसपी जॉर्ज बास्को का कहना है कि उसकी शिनाख्त अब तक नहीं हुई है। सहज समझा जा सकता है कि जब पुलिस ही शिनाख्त नहीं कर पाई तो आगे क्या जांच होगी। इस सारे घटनाक्रम के बीच यह लग रहा है कि मेघना के जीवन के उन छह महीनों का रहस्य, जो वह कहती है कि उसकी याद में नहीं, शायद ही सामने आए।