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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
बहुचर्चित फिल्म ‘स्वदेश’ के नायक ‘मोहन भार्गव’ को इसलिए तारीफ मिली कि विदेश में रहते हुए भी उन्होंने अपने देश को नहीं भुलाया, बल्कि उसकी तरक्की ही चाही। ऐसे ही एक शख्स हैं ज्ञानेंद्र पाण्डे, जो अपने जीवन के चार दशक ब्रिटेन में बिताने के बाद भी अपने देश की माटी से जुड़े हुए हैं। आठ वर्ष पहले उन्होंने तखतपुर के पास एक गांव को गोद लिया था, जहां से आज भी उनका नाता बना हुआ है।
ब्रिटेन के स्वान्सॉ यूनिवर्सिटी में सिविल एंड कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रहे ज्ञानेंद्र पाण्डे ने अपने जीवन में बड़ी ख्याति और उपलब्धियां अर्जित की, लेकिन इन सबके बीच स्वदेश से कभी जुदा नहीं हुए। डेढ़ वर्ष पहले यूनिवर्सिटी से रिटायर हो चुके हैं। उनकी काबिलियत के मद्देनजर ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ने उनकी सेवा, सुविधाएं जारी रखी हैं। मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले श्री पाण्डे आठ साल पहले बिलासपुर अपनी ससुराल आए थे।
एक दिन वे जिले का नक्शा लेकर घर से अकेले ही घूमने निकल पड़े। बस स्टैंड में एक बस में सवार हुए और तखतपुर मार्ग में एक अनजान गांव में बस से उतर गए। वहां उन्होंने एक दुकान से किराए की साइकिल मांगी। परिचय के बगैर दुकान संचालक द्वारा साइकिल देने से इनकार करने पर उन्होंने इंपोर्टेड घड़ी उसे दे दी और साइकिल लेकर अनजान राह पर निकल पड़े। काफी दूर जाने पर उन्हें ‘चोरमा’ नामक एक गांव मिला। यहां की हालत देखकर उन्होंने इस गांव के लिए कुछ करने की ठानी।
पानी की कमी देखकर गांव में हैंडपंप लगवाए, तालाब का मेड़ बनवाया, पंप खुदवाया और स्कूलों में बच्चों को कापी-पुस्तक व खिलौने बांटे। चरोमा से उनका गहरा लगाव आज भी बना हुआ है और हर साल वे वहां पहुंचते हैं। ब्रिटेन में श्री पाण्डे ने अप्रवासी भारतीयों की एक संस्था बनाकर उन्हें भी मदद के लिए प्रोत्साहित किया और समय-समय पर रोटरी क्लब के माध्यम से राशि भेजते रहे, जिसका उपयोग गांव के लिए किया गया।
70 वर्षीय श्री पाण्डेय वर्तमान में ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में जिम्मेदार पदों पर हैं और इंटरनेशनल कांफ्रेंस भी आर्गनाइज करते हैं। उनकी अगली कांफ्रेंस फ्रांस में होनी है। ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि जहां स्वच्छता हो, वहीं सुख-समृद्धि आती है। विदेशों में साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है, जबकि हमारे देश के हर शहर में सफाई करने वालों को हेय दृष्टि से देखा जाता है। सिर्फ सरकारी विभाग बना लेने से कुछ नहीं होता। जरूरत है निचले स्तर पर जागरूकता लाने की और लोगों को प्रेरित करने की। उन्होंने सिंचाई, सफाई, विज्ञान, वातावरण आदि सभी क्षेत्रों में स्कूल-कालेज स्तर पर शोध की आवश्यकता बताई।
महती प्रोजेक्ट को मिली सफलता
प्रोफेसर पाण्डे द्वारा ब्रिटेन में चलाए गए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को सफलता मिली है, जिसमें उन्होंने पाइप लाइन के लीकेज को दूर करने का बीड़ा उठाया था। वहां की पाइप लाइन दशकों पुरानी थी, जिससे करीब 40 फीसदी पानी सूख जाता था। उन्होंने इसका सर्वे कर उपाय सुझाए, जिन पर अब भी अमल किया जा रहा है। श्री पाण्डे ने यहां भी इसी तरह की सर्वेक्षण की सलाह देते हुए कहा कि रात में यह देखा जाना चाहिए कि जब पानी का उपयोग नहीं होता, तब कहां और कितना लीकेज हो रहा है। गर्मी व ठंड के मौसम में लीकेज की समस्या बढ़ जाती है।
स्वान्सॉ में बनाया मेडिटेशन हाल
योगा और मेडिटेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रोफेसर पाण्डे की पहल पर स्वान्सॉ में मेडिटेशन हाल का निर्माण किया गया है, जहां अप्रवासी भारतीय प्रतिदिन आकर अभ्यास करते हैं। उनकी पत्नी श्रीमती गीता पाण्डेय मंदिर कमेटी की पदाधिकारी भी हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से गरीबों को मदद करने के लिए समय-समय पर सामान व राशि भी जुटाई जाती है।