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आखिर कैसे लुटी दुनिया?

कैनेडी हवाई अड्डे पर पसरे अमेरिकी जहाज मानो उनके देश की हालत बयां कर रहे थे। उनका सिर झुका हुआ था। जैसे मंदी से निराश और थके हुए हों। अजीब चुप्पी थी उनके गिर्द। समृद्धि के मायने बने रहना उन्हें अपराध लग रहा था। आज यह देश सिर्फ एक ही बात कर रहा है- किस तरह उबरें। राष्ट्रपति चुनाव के जुनूनी अमेरिकी, फिलहाल अपने भावी नेता से भी यही पूछ रहे हैं- डॉलर मजबूत है- लेकिन जेब में क्यों नहीं है? बैंकों को ठीक कैसे करेंगे?

आर्थिक खुशहाली लौटेगी या नहीं? बड़े-बड़े मॉल, लकदक बाजार और कॉन्टिनेन्टल रेस्त्रां- सब कुछ खाली पड़े हैं। दुनिया के पैसों को नचाने वाली वॉल स्ट्रीट, खुद ध्वस्त पड़ी है - जिस दिन डो जोन्स इंडेक्स 800 अंक गिरा था- भारत की कुल जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद के बराबर नुकसान कर गया। दुनियाभर की विदेशी मुद्रा का एक-तिहाई कारोबार करने वाला लंदन तबाह हो रहा है। अमेरिकी लालच ने कैसे सबको ठगा, इसका सबसे सरल तरीका वॉल स्ट्रीट पर सक्रिय भारतीयों के सुनाए किस्से हैं।

तीन देशों में बसे चार भारतीयों की बर्बादी के पांच किस्से

1 घर लेने से तबाह (यानी सब-प्राइम कांड)

अंगना बेन देसाई, वॉशिंगटन डीसी में अहमदाबाद मूल की 37 वर्षीय शिक्षक
>> पिछले कुछ कर्ज लेकर नहीं चुकाए। इसलिए घर लेना मुश्किल।
>> किश्तें चुकाने वाले साखदार ‘प्राइम’ और डिफॉल्टर ‘सबप्राइम’ श्रेणियों में आते हैं।
>> वॉशिंगटन म्यूचुअल ने 10 प्रतिशत ज्यादा ब्याज के बदले अंगना बेन को ‘सब-प्राइम’ में 3 लाख डॉलर का कर्ज दे दिया।
>> लेकिन चार किश्तों के बाद फिर अंगना बेन खाली हो गईं। बिना कागजात महंगा लेकिन आसान लोन लेना भारी पड़ गया।
>> उन्होंने बैंक से कहा- मकान रख लो। लेकिन संभव नहीं- क्योंकि उसका तो बॉण्ड लीमैन बदर्स बेच चुका!

2 बचत करने पर बर्बाद (यानी सीडीओ घोटाला)

डॉ. आयुष्मान, सिंगापुर में रह रहे जयपुर मूल के 66 वर्षीय रिटायर्ड सर्जन
>> काफी समय बोस्टन में बिताने के बाद तीन तरह के बचत फंड में. 1 लाख डॉलर जमा।
>> सिंगापुर के उनके फंड मैनेजर ने कहा 1 फीसदी के बदले वो उनकी बचत एक बढ़िया बॉण्ड में लगाएगा।
>> यह बॉण्ड दरअसल 50 लाख डॉलर का एक पैकेज है, जो लीमैन बदर्स ने वॉशिंगटन म्यूचुअल के ‘बुरे कर्जो’ को इकट्ठा कर खरीदा है।
>> इसे ‘कॉलैटरल डेब्ट ऑब्लिगेशन’ या सीडीओ जैसा अभिजात्य नाम दे दिया गया है, लेकिन यह शुद्ध घोटाला। कैसे? फंड मैनेजर ने भी हाथ ऊंचे कर दिए।

3 सामान्य जिंदगी जीने से बेहाल (यानी क्रेडिट- क्राइसिस)

वरुण कुमार, न्यूजर्सी में कम्प्यूटर इंजीनियर, इंदौर से 8 साल पहले आए थे।
>> कोई 3 लाख डॉलर सालाना वेतन, कंपनी में लगातार तरक्की। पिछले साल ‘प्राइम’ श्रेणी में होम लोन लेकर घर खरीदा। ठ्ठ अचानक तनख्वाह की तारीख गड़बड़ा गई।
हर पखवाड़े चेक मिलता था- अब डेढ़ माह हो गया।
>> कंपनी ने अजीब पोल खोली- मंदी की चपेट में आए विदेशी बैंकों के डर से उनको कॉमर्शियल बैंक ने साधारण, छोटे समय सीमा की उनकी क्रेडिट ही बंद कर दी।
>> तीन तनख्वाह देर से आने पर : इनकम टैक्स, हाउस टैक्स व किश्त सभी गड़बड़ा गईं। लेकिन धक्क तो वे तब रह गए जब गोल्डमैन सैक के एजेंट ने धमकाया: किश्त दे दें नहीं तो उनका घर व चीजें किश्तों के रूप में चीन/जापान में बिक जाएंगी।

4 कुछ न बचा (यानी वॉल स्ट्रीट का फॉल स्ट्रीट हो जाना)

चिंतामणि पाणिग्रही, चेन्नई मूल के आईआईटी ग्रेजुएट, न्यूयॉर्क से अब लंदन जा बसे। फंड विश्लेषक।
>> सबसे सुरक्षित शेयरों में ही पैसा लगाते हुए करोड़ों कमाए। अचानक दृश्य बदल गया।
>> वॉल स्ट्रीट ने जिन दिग्गजों को धवस्त कर दिया- वे बैंकिंग, इन्श्युरेंस और रीयल एस्टेट के सबसे मजबूत शेयर ही तो थे।
>> यही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी रेटिंग देने वाली एजेंसियों ने जिन को तीन सितारे दिए- वे सबसे ज्यादा गिरे।
>> सबके मूल में एक ही बात थी- लालच।

5 चारों तरफ बेबसी
>> इन्वेस्टमेंट बैंक वॉशिंगटन म्यूचुअल ने ‘बुरा लोन’ इसलिए दिया 10 फीसदी का लालच था।
>> अंगना बेन ने कर्ज इसलिए ले लिया क्योंकि बिना सही आय के बड़े घर का लालच था।
>> लीमैन ने ऐसे गलत कर्जो को इसलिए पैकेज बनाकर आयुष्मान के फंड को बेचा क्योंकि कुलमिलाकर (3000 सब प्राइम केस का 1 बिलियन डॉलर ) किसी और के झूठ पर 10 प्रतिशत से 12 प्रतिशत का मुनाफा कमाने का लालच था।
>> सीडीओ के पैकेज और मोर्डगेज सिक्युरिटी के कागज यूरोप से लेकर खाड़ी देशों तक में बिके। सीधा मामला था-1 बिलियन डॉलर का पैकेज किसी फंड/ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी को बेचने का लालच। हरेक का चेहरा ही डॉलर जैसा हो गया।

- यही नहीं, सबसे बड़ी बीमा कंपनी ए.आई.जी ने इन बुरे कर्जो पर करोड़ों कमाने की लालच में इनका बीमा कर दिया। नाम दिया- कैश डिफॉल्ट स्वॉप ( सीडीएस) चिंतामणि जैसे सभी को बर्बाद तो होना ही था।
-एक-एक कर्ज दस-दस देशों में अलग-अलग पैकेज बनाकर बिका। इस तरह दुनिया भर में लूट मच गई।
(सभी किस्सों में नाम बदल दिए गए हैं)





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