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310 कंपनी अर्धसैनिक बल की मांग

भोपाल. मप्र में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा चुनाव आयोग से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई है। इस बार अर्धसैनिक बलों की करीब 300 कंपनियां और दूसरे राज्यों की पुलिस व होमगार्ड के 15000 जवान अतिरिक्त जरूरत बताई गई है।

प्रदेश में बालाघाट, मंडला, सीधी, सिंगरौली और डिंडौरी नक्सल प्रभावित जिले हैं। सूत्र बताते हैं कि इन जिलों में 405 मतदान केंद्रों को नक्सल प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। डकैती प्रभावित नौ जिले हैं। सांप्रदायिक रूप से अति संवेदनशील 18 और संवेदनशील 14 जिले बताए गए हैं। इनमें भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, धार, बुरहानपुर, खंडवा, और खरगोन जिले शामिल हैं।

2003 चुनाव में क्या मिला था
विधानसभा चुनाव 2003 में मप्र ने चुनाव आयोग से अर्धसैनिक बल की करीब सवा दो सौ कंपनियों की मांग की थी। इसकी तुलना में लगभग 100 कंपनियां मिली थीं। इनके अलावा उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि पड़ोसी राज्यों से 10 हजार से ज्यादा होमगार्ड भी चुनाव के लिए मिले थे।

एक चरण में मतदान की स्थिति में राज्य के लिए आवश्यक केंद्रीय अर्धसैनिक बल और अतिरिक्त पुलिस व होमगार्ड जवानों का आकलन कर चुनाव आयोग को पत्र भेज दिया गया है। मंगलवार को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद अब इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी जाएगी।
- संजीव सिंह, आईजी विशेष शाखा

कहां लगती है पुलिस, कहां तैनात होता है अर्धसैनिक बल
चुनाव में मतदान केंद्रों पर जिला पुलिस, होमगार्ड और दूसरे राज्यों की पुलिस के जवानों को लगाया जाता है। वहीं नक्सल-डकैत प्रभावित क्षेत्रों, दूसरे राज्यों की सीमा से लगे जिलों की सीमा सील करने, पार्टी प्रत्याशियों, पर्यवेक्षकों, इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों की सुरक्षा, थाना-जिला और जोन रिजर्व के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवानों को लगाया जाता है।

अलग-अलग स्थिति का आंकलन कर बता दी थी जरूरत
सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन ने चुनाव की तारीखों की घोषणा में हो रही देरी के कारण शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को पिछले सप्ताह ही पुलिस बल की मांग संबंधी पत्र भेज दिया था। इसमें यह दर्शाया गया था कि एक चरण की स्थिति में कितने पुलिस बल की आवश्यकता होगी और दो व तीन चरण में मतदान होने पर कितनी पुलिस जरूरी होगी।





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