bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

बिन डिग्री बन गए 2400 डॉक्टरेट

जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय ने बगैर डिग्री दिए ही 2400 शोधकर्ताओं को डॉक्टरेट बना दिया है। चेन्नई, बैंगलूर, पुणो आदि कुछ शहरों की संस्थानों ने पीएचडी धारकों को डिग्री नहीं होने की वजह से डॉक्टरेट मानने से इन्कार कर दिया है।

दरअसल राजस्थान विश्वविद्यालय ने पिछले 7 वर्ष से पीएचडी की डिग्री जारी नहीं की है। विश्वविद्यालय डिग्री के बजाय अस्थायी प्रमाण पत्र थमा रहा है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राज्य की कुछ संस्थाएं अस्थायी प्रमाण पत्र को पीएचडी डिग्री का दर्जा दे रही हैं। कई दूसरे शहरों में पीएचडी डिग्री की अनिवार्यता होने के कारण अस्थायी प्रमाण पत्र का कोई महत्व नहीं रहता है।

कुलपति की सिफारिश को डिग्री माना
कई शहरों में अस्थायी प्रमाण पत्र मान्य नहीं हैं। ऐसी स्थिति में 100 से अधिक लोगों ने विश्वविद्यालय में डिग्री के लिए आवेदन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंग्रेजी में एक नोट तैयार करके आवेदक को थमा दिया। विश्वविद्यालय की ओर से जारी दस्तावेज में यह लिखकर दिया गया है कि इस व्यक्ति ने राजस्थान विश्वविद्यालय से पीएचडी की है, इसलिए इसे बगैर डिग्री के मान्य माना जाए। लिखित दस्तावेज में राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति के दस्तखत होने के कारण दस्तावेज को ही डिग्री के समान अन्य राज्यों के कुछ संस्थानों ने माना है।

केवल डिग्री का महत्व
राजस्थान विश्वविद्यालय से पीएचडी कर चुके स्टील व्यवसायी विजय गर्ग ने बताया कि पीएचडी करने पर अंकतालिका (मार्कशीट) तो मिलती नहीं है, केवल डिग्री का ही महžव रहता है। ऐसी स्थिति में अस्थायी प्रमाण पत्र को कौन मानेगा। डिग्री ही सबकुछ होती है। पिछले 6 साल में कई बार विश्वविद्यालय जाकर डिग्री के लिए पूछ चुका हूं। अब डिग्री आने की उम्मीद छोड़ चुका हूं।

जिन लोगों को बगैर डिग्री के परेशानी हुई, उनकी समस्याएं विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुलझाई हैं। जिस भी व्यक्ति ने आकर डिग्री मांगी उसको कुलपति के हाथों हस्ताक्षरित दस्तावेज दिया गया, जो कि डिग्री के समान ही है। डिग्री तैयार कराने का कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही पीएचडी धारकों को डिग्री मिल जाएगी।
-डॉ. नीलू महाजन, उपकुलसचिव (रिसर्च), राजस्थान विवि

डिग्री के चक्कर में गई नौकरी
राजस्थान विश्वविद्यालय से वन एवं पौध के क्षेत्र में पीएचडी करने वाली रजनी शर्मा ने बताया कि बैंैगलूर में एक निजी संस्था में नौकरी लग गई थी। लिखित और इंटरव्यू में पास हो गई थी। उसके बाद दस्तावेज जमा कराने थे। अस्थायी प्रमाण पत्र को नहीं माना गया। जयपुर पहुंचकर लिखित नोट लिया, तब तक समय निकल गया। इस कारण हाथ में आई हुई नौकरी चली गई।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: