नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने म्यूचुअल फंड उद्योग को अल्पकालिक ऋण के जरिये 20,000 करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा की है ताकि भुगतान के दबाव से उबरा जा सके।
रिजर्व बैंक ने बैंकों को नौ फीसदी सालाना की दर से अल्पकालिक (14 दिन) ऋण देने का विशेष प्रावधान बनाया है, ताकि फंड अपनी ऋण भुगतान संबंधी जरूरतें पूरी कर सकें। रिजर्व बैंक और म्यूचुअल फंड आपसी परामर्श के बाद संयुक्त रूप से उचित दर तय करेंगे, जिस पर बैंक यूटीआई, एमएफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड जैसी कंपनियों को ऋण देंगे।
वित्तीय संकट के मद्देनजर जमाकर्ताओं की ओर से निकासी की मांग बढ़ने के कारण म्यूचुअल फंडों को भुगतान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। म्यूचुअल फंड उद्योग ने वित्तमंत्री चिदंबरम को सूचित किया कि वे बैंकों से ली गई उधारी के लिए जमा प्रमाणपत्र को कोलेटरल (गारंटी) के तौर पर मुहैया कराएंगे।
कुछ म्यूचुअल फंडों को ऋण और पूंजी बाजार उपकरणों के भुगतान के कारण नकदी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या सरकार के सामने सोमवार रात को ही लाई गई और इस बारे में वे रिजर्व बैंक के त्वरित कदम का स्वागत करते हैं। यह फैसला सेबी अध्यक्ष सीबी भावे और रिजर्व बैंक के उप गवर्नर की मंगलवार सुबह हुई बैठक के बाद लिया गया। इससे पहले परिसंपत्ति प्रबंध उद्योग की प्रमुख कंपनियों के साथ बैठक हुई। इसके अलावा, सरकार ने वित्त सचिव के नेतृत्व में एक समिति गठित की है, जो नकदी की स्थिति का आकलन करेगी और नकदी का प्रवाह बढ़ाएगी। यह समिति इसी सप्ताह अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
वित्तमंत्री ने किया स्वागत : भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी से उत्साहित वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि अमेरिकी, यूरोपीय और पूर्वी एशियाई बाजार में आए उछाल का असर यहां भी दिखाई देगा। उन्होंने रिजर्व बैंक की ओर से म्यूचुअल फंड उद्योग में नकदी का प्रवाह और अधिक बढ़ाने संबंधी कदमों की घोषणा का भी स्वागत किया है।