इंदौर. पश्चिम रेलवे के एक गलत निर्णय से उत्तर और दक्षिण भारत को सीधे जोड़ने में ज्यादा समय लग सकता है। मामला रतलाम-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज परियोजना का है।
रतलाम मंडल पहले रतलाम-इंदौर-महू सेक्शन को ब्रॉडगेज करना चाहता है जबकि यात्रियों की सुविधा को देखते हुए पहले महू-खंडवा सेक्शन ब्रॉडगेज होना चाहिए। हालांकि रतलाम मंडल के डीआरएम प्रभातकुमार वाजपेयी का कहना है महू-खंडवा सेक्शन में काम करना कठिन है इसलिए पहले रतलाम-इंदौर-महू सेक्शन का पार्ट इस्टिमेट भेज रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मध्य रेलवे ने अकोला-खंडवा के बीच ब्रॉडगेज लाइन डालने की तैयारियां कर ली हैं। यदि पश्चिम रेलवे पहले खंडवा-महू और फिर महू-इंदौर के बीच ब्रॉडगेज लाइन डालता है तो एक सिरे से काम होता जाएगा और दूसरे सिरे में यातायात चालू रखा जा सकेगा। यदि पश्चिम और मध्य रेलवे ने अलग-अलग छोर से काम किया तो महू-खंडवा ट्रैक अलग-थलग पड़ जाएगा।
सूत्रों ने बताया बजट में ब्रॉडगेज परियोजना के लिए करीब 32 करोड़ रुपए मिले हैं। पश्चिम रेलवे के पास रतलाम से खंडवा के कुछ पहले तक का हिस्सा है और खंडवा से अकोला तक का भाग मध्य रेलवे का है।
मध्य रेलवे तो खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज के अर्थवर्क और पुल-पुलिया चौड़ी करने की तैयारी कर चुका है लेकिन पश्चिम रेलवे अब तक रेलवे बोर्ड से पार्ट इस्टिमेट भी स्वीकृत नहीं करा पाया है। फिर यह भी ताज्जुब की बात है कि रेलवे बोर्ड ने ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए हैं कि रतलाम-इंदौर-महू सेक्शन पहले ब्रॉडगेज करें। यह निर्णय पश्चिम रेलवे और रतलाम मंडल के अधिकारियों का है।